रिपोर्ट=मोबीन मन्सुरी
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर कन्नौज जिले की सीमा के अंतर्गत सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं। जिसके लिए शायद यूपीडा जिम्मेदार है क्योंकि सुरक्षित सफर का भरोसा देकर भरपूर टोल वसूल किया जा रहा, लेकिन सुरक्षा शून्य है। एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही से कई बार हादसे हुए और मौतें भी हो चुकी है,
लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
एक्सप्रेसवे पर हादसों की रोकथाम के लिए लोहे के जाल जरूर लगाए गए हैं, जिससे कोई आसानी से इधर से उधर न हो सके। लेकिन इन जालों को कई जगह ग्रामीणों ने अपना आवागमन बनाने के लिए तोड़ दिए हैं। इससे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर आये दिन मवेशी पहुंच जाते हैं। यह मवेशी आए दिन हादसे का सबब बन रहे हैं।
टोल भरपूर, सुरक्षा शून्य
आगर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षित व जल्दी घर पहुंचने के लिए ही यात्री टोल टैक्स देता है। टोल के बदले प्रशासन की जिम्मेदारी यात्रियों को सुरक्षा मुहैया करानी होती है, लेकिन यहां पर टोल तो भरपूर लिया जा रहा और सुरक्षा शून्य है। एक्सप्रेस-वे पर जगह-जगह पर झुंडा बनाकर आवारा मवेशी घूमते हैं और इसके अलावा और कई दिक्कतो का यात्रियों को सामना करना पड़ता है।
गाड़ी खराब होने पर किनारे नहीं किया जाता, मवेशी की मौत होने पर शव हटाया नहीं जाता समेत कई दिक्कतें बनी हुई है। यह जिम्मेदारी यूपीडा के सुरक्षा कर्मियों व यूपी 100 की गश्त करनी वाली टीमों की है लेकिन इसको नजरअंदाज कर दिया जाता है।
यूपिडा इस पर नहीं देता ध्यान
एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार को देखते हुए सुरक्षा के भी इंतजाम हैं। दोनों तरफ बडे़-बड़े एंगल लगाए गए हैं। इसके साथ ही कोई आसानी से एक साइड से दूसरी साइड न पहुंच पाए, इसके लिए बीच डिवाइडर पर जाल लगाकर सुरक्षा की गई है। किनारे बसे गांवों से कोई भी जानवर या ग्रामीण वे पर न चढ़ पाए, इसके लिए लोहे के जाल व तार लगाकर सीमांकन किया गया है पर जालियां आसपास के ग्रामीणों ने तोड़ दीं और एक्सप्रेसवे पर चढ़ना शुरू कर दिया।
जाल टूट जाने से जानवर भी घूमने लगे। ये अन्ना जानवर तेज रफ्तार मे चल रहे वाहनों के लिए परेशानी का सबब बनने लगे हैं। कई बार इनके सामने आ जाने से वाहन सवार लोग हादसे का शिकार हो चुके है। इसके बाद भी यूपिडा (उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट अथारिटी) और प्रशासन मौन बना हुआ है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर कन्नौज जिले की सीमा के अंतर्गत सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं। जिसके लिए शायद यूपीडा जिम्मेदार है क्योंकि सुरक्षित सफर का भरोसा देकर भरपूर टोल वसूल किया जा रहा, लेकिन सुरक्षा शून्य है। एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही से कई बार हादसे हुए और मौतें भी हो चुकी है,
लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
एक्सप्रेसवे पर हादसों की रोकथाम के लिए लोहे के जाल जरूर लगाए गए हैं, जिससे कोई आसानी से इधर से उधर न हो सके। लेकिन इन जालों को कई जगह ग्रामीणों ने अपना आवागमन बनाने के लिए तोड़ दिए हैं। इससे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर आये दिन मवेशी पहुंच जाते हैं। यह मवेशी आए दिन हादसे का सबब बन रहे हैं।
टोल भरपूर, सुरक्षा शून्य
आगर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षित व जल्दी घर पहुंचने के लिए ही यात्री टोल टैक्स देता है। टोल के बदले प्रशासन की जिम्मेदारी यात्रियों को सुरक्षा मुहैया करानी होती है, लेकिन यहां पर टोल तो भरपूर लिया जा रहा और सुरक्षा शून्य है। एक्सप्रेस-वे पर जगह-जगह पर झुंडा बनाकर आवारा मवेशी घूमते हैं और इसके अलावा और कई दिक्कतो का यात्रियों को सामना करना पड़ता है।
गाड़ी खराब होने पर किनारे नहीं किया जाता, मवेशी की मौत होने पर शव हटाया नहीं जाता समेत कई दिक्कतें बनी हुई है। यह जिम्मेदारी यूपीडा के सुरक्षा कर्मियों व यूपी 100 की गश्त करनी वाली टीमों की है लेकिन इसको नजरअंदाज कर दिया जाता है।
यूपिडा इस पर नहीं देता ध्यान
एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार को देखते हुए सुरक्षा के भी इंतजाम हैं। दोनों तरफ बडे़-बड़े एंगल लगाए गए हैं। इसके साथ ही कोई आसानी से एक साइड से दूसरी साइड न पहुंच पाए, इसके लिए बीच डिवाइडर पर जाल लगाकर सुरक्षा की गई है। किनारे बसे गांवों से कोई भी जानवर या ग्रामीण वे पर न चढ़ पाए, इसके लिए लोहे के जाल व तार लगाकर सीमांकन किया गया है पर जालियां आसपास के ग्रामीणों ने तोड़ दीं और एक्सप्रेसवे पर चढ़ना शुरू कर दिया।
जाल टूट जाने से जानवर भी घूमने लगे। ये अन्ना जानवर तेज रफ्तार मे चल रहे वाहनों के लिए परेशानी का सबब बनने लगे हैं। कई बार इनके सामने आ जाने से वाहन सवार लोग हादसे का शिकार हो चुके है। इसके बाद भी यूपिडा (उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट अथारिटी) और प्रशासन मौन बना हुआ है।
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