जिला संवाददाता बस्ती
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रो मेंकायस्थ परिवार द्वारा भगवान चित्रगुप्त की पूजा अर्चना की गयी।यम द्वित्तीया के अवसर पर चित्रगुप्त भगवान का पूजन का आयोजन किया गया।प्राणियों के द्वारा सृष्टि के अच्छे बुरे सभी कर्मो का लेखा-जोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त की प्रत्येक बर्षो की तरह शुक्रवार को शहर के बिभिन्न स्थानो सहित ग्रामीण इलाकों में धूमधाम से की गई
हाथ में कर्म की किताब, कलम व दवात लिये चित्रगुप्त की प्रतिमा श्री चित्रगुप्त को याद करते हुए,आज के दिन कायस्थ समाज के लोग कलम की पूजा करते हैं। धूमधाम से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाने वाला कलम दवात पूजा के नाम से विख्यात चित्रगुप्त पूजा के संबंध में वेद व पुरानों में भी जानकारियां मिलती है। ऐसी मान्यता है, कि मनुष्य की आत्मा मृत्यु उपरान्त जब यमराज के दरबार में जाती है, तब वहीं उनके कर्मो का लेखा-जोखा होता है। भगवान चित्रगुप्त ही उनके कर्मो का लेखा-जोखा रखते हैं, और जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त जीवों के सभी कर्मो को अपनी पुस्तक में लिखते रहते हैं। जब जीवात्मा मृत्यु के पश्चात यमराज के समक्ष पहुंचता है तो उनके कर्मो को एक-एक कर सुनाते हैं और उसी के अनुरूप उन्हें फल मिलता है। भगवान चित्रगुप्त के संबंध में कहा जाता है,कि वे परम पिता ब्रह्मा जी के अंश से उत्पन्न हुए हैं। सृष्टि की रचना के क्रम में देव, असुर, गंधर्व, अप्सरा, स्त्री, पुरुष, पशु-पक्षी आदि का ब्रह्मा ने सृजन किया। इसी क्रम में यमराज का भी जन्म हुआ। धर्मानुसार उन्हें जीवों को सजा देने का कार्य प्राप्त हुआ था। यमराज ने जब एक योग्य सहयोगी की मांग ब्रह्मा से की तो ब्रह्मा जी ध्यानलीन हो गये। और एक हजार वर्ष की तपस्या के बाद एक पुरुष उत्पन्न हुआ। ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न होने के कारण कायस्थ कहलाया और नाम चित्रगुप्त पड़ा।
इस दिन अक्षत, कुमकुम, सिंदूर, पुष्प, मिष्टान आदि से भगवान चित्रगुप्त की पूजा अर्चना की जाती है तथा बुरे कर्मो के लिये क्षमा याचना की जाती है।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रो मेंकायस्थ परिवार द्वारा भगवान चित्रगुप्त की पूजा अर्चना की गयी।यम द्वित्तीया के अवसर पर चित्रगुप्त भगवान का पूजन का आयोजन किया गया।प्राणियों के द्वारा सृष्टि के अच्छे बुरे सभी कर्मो का लेखा-जोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त की प्रत्येक बर्षो की तरह शुक्रवार को शहर के बिभिन्न स्थानो सहित ग्रामीण इलाकों में धूमधाम से की गई
हाथ में कर्म की किताब, कलम व दवात लिये चित्रगुप्त की प्रतिमा श्री चित्रगुप्त को याद करते हुए,आज के दिन कायस्थ समाज के लोग कलम की पूजा करते हैं। धूमधाम से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाने वाला कलम दवात पूजा के नाम से विख्यात चित्रगुप्त पूजा के संबंध में वेद व पुरानों में भी जानकारियां मिलती है। ऐसी मान्यता है, कि मनुष्य की आत्मा मृत्यु उपरान्त जब यमराज के दरबार में जाती है, तब वहीं उनके कर्मो का लेखा-जोखा होता है। भगवान चित्रगुप्त ही उनके कर्मो का लेखा-जोखा रखते हैं, और जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त जीवों के सभी कर्मो को अपनी पुस्तक में लिखते रहते हैं। जब जीवात्मा मृत्यु के पश्चात यमराज के समक्ष पहुंचता है तो उनके कर्मो को एक-एक कर सुनाते हैं और उसी के अनुरूप उन्हें फल मिलता है। भगवान चित्रगुप्त के संबंध में कहा जाता है,कि वे परम पिता ब्रह्मा जी के अंश से उत्पन्न हुए हैं। सृष्टि की रचना के क्रम में देव, असुर, गंधर्व, अप्सरा, स्त्री, पुरुष, पशु-पक्षी आदि का ब्रह्मा ने सृजन किया। इसी क्रम में यमराज का भी जन्म हुआ। धर्मानुसार उन्हें जीवों को सजा देने का कार्य प्राप्त हुआ था। यमराज ने जब एक योग्य सहयोगी की मांग ब्रह्मा से की तो ब्रह्मा जी ध्यानलीन हो गये। और एक हजार वर्ष की तपस्या के बाद एक पुरुष उत्पन्न हुआ। ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न होने के कारण कायस्थ कहलाया और नाम चित्रगुप्त पड़ा।
इस दिन अक्षत, कुमकुम, सिंदूर, पुष्प, मिष्टान आदि से भगवान चित्रगुप्त की पूजा अर्चना की जाती है तथा बुरे कर्मो के लिये क्षमा याचना की जाती है।

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