रिपोर्ट - अरविन्द शर्मा
रूरा
कानपुर देहात फसल अवशेष जलाने से वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड की
मात्रा बढ़ जाती है धुएँ में कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डायऑक्साइड जैसी
गैसों के दुष्प्रभाव से आंखें लाल हो जाती हैं ,चक्कर आने लगते हैं ।
श्वाँस रोग व स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा पर्यावरण एवं जीव
जंतुओं को भारी नुकसान होता है
उक्त बात रैली निकाले जाने से पूर्व ओलिंपिक
संघ से मान्य खेल ग्रेपलिंग की राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता केंद्रीय
विद्यालय माती की छात्रा शान्या ने बच्चों को संबोधित करते हुए कही उक्त
खेल के राज्य स्तरीय स्वर्ण पदक विजेता शिवम ने अपने संबोधन में कहा कि
फसल अवशेष जिस स्थान पर जलाया जाता है उस स्थान के लाभदायक ह्यूम्स जलकर
नष्ट हो जाते हैं जिससे भूमि बंजर हो जाती है और धुएं के कारण फसल उत्पादन
लगातार घटता जा रहा है, जिससे जागरूकता के अभाव में हमारा अन्नदाता किसान
लगातार आर्थिक रूप से कमजोर होता जा रहा है ।
साथ ही सड़क किनारे लोग कूड़ा
जला देते हैं जिससे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है और अधिक गर्मी न सह पाने के
कारण जीव जंतु विलुप्त हो रहे हैं कूड़ा जलाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाने का अधिकार रखती है । बाद में यही
संगोष्ठी रैली में बदल गई जिसमें आस्था मिश्रा आर्यन,अर्चना त्रिपाठी,
सूरज,अभय सौरभ दीपक आरुष वर्षा ओम प्रियंका मिनाक्षी सहित तीस से अधिक
बच्चों ने फसल अवशेष न जलाओ पर्यावरण बचाओ जागरूकता रैली निकाली यह रैली
कबीर आश्रम से प्रारम्भ होकर मंडी समिति होते हुए हीरानगर में जाकर समाप्त
हुई ।

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