रिपोर्ट- अरविन्द शर्मा
माती
कानपुर देहात स्वच्छता हमारा जीवन दर्शन है । विश्व बैंक के सर्वेक्षण के
अनुसार स्वच्छता पर दस रुपये का खर्च बीमारी से नब्बे रुपये बचाता है ।
खुले में शौंच एक शर्मनाक सामाजिक बुराई है खुले में की गई शौंच पर बैठी
मक्खी छ:पैरों से मल लाकर भोजन को दूषित करती है । सभ्य समाज के लिए यह
अत्यंत घृणित सत्य हैं ।
इसके कारण डायरिया पीलिया बाल झड़ना जोडों में दर्द दांतों और चेहरे का पीलापन लीवर की खराबी पेट दर्द जैसी बीमारियां हमारे समाज को आर्थिक और शीरीरिक रूप से कमजोर बना रही है जिससे हमारे राष्ट्र की मेधा कमजोर होती है । उक्त बात केन्द्रीय विद्यालय माती के प्राचार्य ए के राय ने रैली निकाले जाने से पूर्व भारत के भविष्य नन्हे मुन्ने बच्चों को संबोधित करते हुए कही ।शिक्षक सुन्दर लाल ने बच्चों को खुले में शौंच न जाने कूडा़ नहीं जलाने तथा मानसिक स्वच्छता शारीरिक स्वच्छता और परिवेशीय स्वच्छता की शपथ दिलाई। स्वच्छता की शपथ दिलाई । इस अवसर पर ग्रेपलिंग खेल की अंतर्राष्ट्रीय रजत पदक विजेता शान्या ने कूड़ा नहीं जलाएंगे वायु स्वच्छ बनाएंगे ,हम सब का है सपना स्वच्छ हो भारत अपना,स्वच्छ भारत स्वस्थ्य भारत,नई रजाई नया गद्दा शौंच को बदलो अड्डा,डिब्बा बोतल बंद करो शौचालय का प्रबंध करो के नारे लगवाए । रैली में शिक्षक निखिल मिश्रा, पियूष,रजनी त्रिवेदी एवं बच्चों में शिवम निवेदिता श्रेया प्रांजल राय श्रुति मिश्रा,अविष्का,सौम्या, आदर्श तिवारी, सहित सौ से अधिक बच्चे ओजस्वी नारे लगाते हुए चल रहे थे
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