महेंद्र मिश्रा ब्यूरो उत्तर प्रदेश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि
पांच राज्यों के चुनावों में विचारधारा के आधार पर वोटो का ध्रुवीकरण हुआ
है। जनता ने जता दिया है कि सांप्रदायिकता और विभाजनकारी ताकतों के लिए कोई
जगह नहीं है। अहंकार और फरेब की राजनीति चलने वाली नहीं है। देश के गरीबो,
नौजवानो, किसानों और कमजोर वर्ग के लोगो की उपेक्षा के परिणाम अच्छे नहीं
होते है।
आजादी की लड़ाई के समय जो मूल्य स्थापित हुए थे
वे आज की राजनीति में भी मानक हैं। उनका तिरस्कार करने वालों की जिंदगी
ज्यादा नहीं हो सकती है। भारत सामाजिक सद्भाव और परस्पर सौहार्द की
आधारशिला पर टिका है। संवैधानिक मर्यादाओं से खिलवाड़ और नफरत की राजनीति
करने की साजिशें जनता की निगाह से छुपी रहने वाली नहीं है।
विडंबना है कि भाजपा नेतृृत्व दो तरह की बातें कर रहा है। वह अपने
कार्यकर्ताओं को भी बहकाने में लगा है। अपनी हार से कोई सबक सीखने के बजाय
उल्टे हार से निराश न होने और 2019 के चुनाव की बात कर रहा है। लोकतंत्र में जनादेश को सम्मानजनक तरीके से बिना किसी लागलपेट के पूरी ईमानदारी से
स्वीकार करना चाहिए। किन्तु भाजपा लगता है अपनी जनविरोधी नीतियों में बदलाव
नहीं लाना चाहती हैं। जन समस्याओं से मुंह फेरने का नतीजा उसके सामने है।
फिर भी भाजपा हठी रूख रहता हैं तो लोकतंत्र की व्यवस्था के सामने नई
चुनौतियां खड़ी हो सकती है।
नोटबंदी और जीएसटी से आर्थिक
संकट गहराया है। व्यापार चैपट हुआ है और बेरोजगारी बढ़ी है। इसकी
स्वीकारोक्ति को भाजपा नेतृृत्व अब भी तैयार नही है और बहकी-बहकी बातें कर
रहा हैं। जो 5 वर्ष भाजपा ने बर्बाद किए हैं उसको लेकर भी उसमें अपराध बोध न
होना आश्चर्यजनक है। भाजपा की आर्थिक-सामाजिक नीतियों से देश को बहुत
नुकसान हुआ है, यह मानने को इसके नेता अभी भी तैयार नही है।
समाजवादी पार्टी ने हमेशा सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। नफरत फैलाने वालों से संघर्ष किया
है। समाज को जोड़ने और सबको साथ लेकर चलने के साथ सामाजिक सद्भाव का प्रसार
उसकी नीति का एक प्रमुख अंग रहा है। समाजवादी विचारधारा ही आज की राजनीति
में सर्वाधिक जनोन्मुख और समावेशी है।

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