ब्यूरो गोरखपुर -कृपा शंकर चौधरी
सरकार के द्वारा किसानों का कितना भी हमदर्द बताया जाए
किन्तु किसानों का शोषण किसी न किसी रूप में जारी है। ताज़ा मामला गोरखपुर
के कई तहसील क्षेत्र का है जहां यूरिया विक्रेताओं द्वारा अधिकतम खुदरा
मुल्य से ज्यादा भाव पर यूरिया का विक्रय किया जा रहा है साथ ही साथ
किसानों को सल्फर या जिंक भी लेने पर मजबूर किया जा रहा है। इस संबंध में
एक यूरिया निर्माता कंपनी के टोल फ्री नंबर पर संपर्क करने पर बताया गया कि
सरकार द्वारा यूरिया के साथ सल्फर भी देने की बात कही गई हैं।
दरअसल वर्तमान केन्द्र सरकार द्वारा यूरिया के कालाबाजारी रोकने के लिए इसे नीम कोटेड कर दिया गया ताकि समय पर किसानों को सस्ते में यूरिया उपलब्ध हो सके किन्तु गोलमाल करने वाले शोषण का नया तरीका खोज निकालते हैं को चरितार्थ करते हुए इसके साथ सल्फर एवं जिंक का खेल चालू हो गया है जिससे किसानों को मजबूरन यूरिया के साथ इसे अधिकतम खुदरा मुल्य से ज्यादा कीमत पर लेना पड़ रहा है। मोतीराम , झंगहा, कौडीराम आदि जगहों पर खाद विक्रेताओं से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि कंपनी से ही यूरिया के साथ सल्फर जबरदस्ती दिया जा रहा है जिससे हम लोग भी बेबस है।
इस संबंध
में यूरिया निर्माता कंपनी के टोल फ्री नंबर पर संपर्क करने पर बताया गया
कि 45 किलो ग्राम यूरिया की उत्तर प्रदेश में 299 रुपए की कीमत है और सल्फर
फसल के लिए फायदेमंद होने के कारण सरकार द्वारा यूरिया के साथ देने को कहा
गया है। जबकि विक्रेताओं द्वारा यूरिया का किसानों से 330 रूपए से अधिक
कीमत वसूली जा रही है साथ ही साथ 70 रूपए का सल्फर बोरी पिछे लेना
अनिवार्य है। इस जबरदस्ती से क्षेत्र के किसान काफी परेशान हैं । रामपुर के
एक किसान ने बताया कि यूरिया लेना हमारी मजबूरी है जिसका फायदा उठाते हुए
विक्रेताओं द्वारा शोषण किया जा रहा है।

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