राजनीतिक दल अब अपनी हार का दोष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर मढ़ने
से पहले कई बार सोचेंगे क्योंकि निर्वाचन आयोग ने 2019 लोकसभा चुनाव से
पहले ईवीएम को मोबाइल ‘एप’ से ऑनलाइन जोड़ने का फैसला किया है।
फोटो गूगल स्रोत
2019 लोकसभा चुनाव की तैयारी के चलते प्रथम चरण की जांच में बरेली समेत अन्य मंडल और जनपद मुख्यालयों पर ईवीएम की तकनीकी कमियां दूर करने का काम चल रहा है। खराब मशीनों को चुनाव प्रक्रिया से अलग किया जाएगा।
इसके लिए आयोग ने एक मोबाइल ‘एप’ डेवलप किया है। इस ‘एप’ से ईवीएम के नंबर जोड़े जाएंगे। कोई भी अपने स्मार्ट फोन से चुनाव आयोग के ‘एप’ पर तय नंबर डालकर ईवीएम की स्थिति पता कर सकेगा। चुनाव आयोग का दावा है कि इस कदम से ईवीएम को लेकर किसी भी तरह का भ्रम नहीं रहेगा।
चुनाव आयोग के ‘मोबाइल एप’ से यह भी जाना जा सकेगा कि ईवीएम किस कंपनी की है और कितनी पुरानी है। उसका नंबर क्या है। वह किस बूथ पर या कौन से कमरे में रखी है। किस ईवीएम में कितने वोट बंद हैं।
2019 लोकसभा चुनाव की तैयारी के चलते प्रथम चरण की जांच में बरेली समेत अन्य मंडल और जनपद मुख्यालयों पर ईवीएम की तकनीकी कमियां दूर करने का काम चल रहा है। खराब मशीनों को चुनाव प्रक्रिया से अलग किया जाएगा।
वोटिंग के लिए पूरी तौर पर ठीक ईवीएम ही रखी जाएंगी। प्रथम चरण की जांच के
लिए जल्द ही खास इंजीनियर बुलाए जाएंगे। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और
चुनाव प्रेक्षकों की मौजूदगी में ईवीएम की पारदर्शिता को परखा जाएगा।

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