उत्तर प्रदेश में अजित सिंह पार्टी राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) ने लोकसभा के लिए 5 सीटें मांग कर महागठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. आरएलडी की मुज़फ्फरनगर, बागपत, मथुरा, अमरोहा जैसे क्षेत्रों में अच्छी पकड़ मानी जाती है.इसके साथ ही इनकी राज्य के किसानों के बिच भी अच्छी पकड़ है. बता दें कि पहले से ही सपा -बसपा के बीच 37-37 सीटों का बटवारा हो चूका है.
त्रों के हवाले से खबरें आईं थी कि महागठबंधन में तय हुआ है कि सपा और बसपा 37-37 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. रायबरेली और अमेठी लोकसभा सीट सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए छोड़ दी जाएगी. बाकी की 4 सीटें सहयोगी दलों को दी जाएंगी. वहीं आरएलडी अकेले 5 सीटें मांग रही है, ऐसे में महागठबंधन में पेंच फंस सकता है.
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में आरएलडी को करारी शिकस्त मिली थी. खुद पार्टी अध्यक्ष अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी चुनाव हार गए थे. हालांकि साल 2018 में कैराना लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सपा और बसपा के सहयोग से आरएलडी के प्रत्याशी तबस्सुम हसन को जीत मिली थी. यानी इस वक्त लोकसभा में आरएलडी के एक मात्र सांसद हैं. इसके अलावा 2017 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में भी आरएलडी के एक मात्र विधायक जीत पाए थे.

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