जिला संवाददाता - अरविन्द शर्मा
उत्तर प्रदेश में आम जनमानस की समस्याओ को लेकर नित्य नई नई योजनाओ की शुरुआत सरकार द्वारा की जाती परन्तु इन योजनाओ की यदि जमीनी हकीकत परखी जाये असल में जिन लोगो को इनका लाभ मिलना चाहिए उनको तो जरा भी मिल ही नही रहा है और ये बात अब आम हो चुकी है दरसल हम बात कर रहे
प्रदेश में कोटेदार द्वारा रासन की शिकायते लगातार खबरे मिल रही है कि कानपुर देहात में जिस भी ब्लाक के गावो का आप रुख करे बता दे कि मैथा ब्लाक के साहनी खेड़ा गाँव एक अकेला गाँव नही है जिसमे ये समस्या देखी गई है तो पहली समस्या गाँव के लोगो की एक है वो गरीबो को मिलने वाला सरकारी राशन तो कही कोटेदार की हथ धर्मिता परिवरो को उनको मिलने वाला राशन नही मिल पा रहा है और इसकी शिकायत इस गाव के लोग जिले के आलाधिकारियो से अनगिनत बार कर चुके है लेकन अब आपको इस जनपद के अधिकारियो के हाल ये है कि उस गाँव में जाना ही नही चाहते है और कार्यालय के गर्म ब्लोवर में ही बैठ सारी समस्याओ को सुलझाना चाहते है|
पूरा मामला है जनपद के मैथा ब्लाक के गाँव साहनी खेडा का है जहा कोटेदार की दबंगई के चलते गाँव के लोगो ने गाव से लेकर जनपद के जिलाधिकारी कार्यालय तक अपनी समस्या को लेकर फिर एक बार गुहार लगाई है इन ग्रामीणो को सरकारी तंत्र द्वरा केवल जांच का दिलासा जैसे शब्द के अलावा कुछ हांथ नही लगा है तो आखिर इन गरीब ओर लाचार लोगो की समस्या आखिर कब सुनी जाएगी ओर इन परिवारों को प्रदेश सरकार द्वारा भेजे गये राशन को इन परिवारों को दिया जायेगा दरअसल इन लोगो का कहना है हम लोग जब इस कोटेदार के यहा राशन लेने जाते है तो ये अंगूठा न मैच करने की वजह से राशन नही देता है तब इस पर बहेस शुरू हो जाती ओर इसी दौरान इस कोटेदार के लोग बंदूक के दम पर मारपीट को आमादा हो जाते है
पूरा मामला है जनपद के मैथा ब्लाक के गाँव साहनी खेडा का है जहा कोटेदार की दबंगई के चलते गाँव के लोगो ने गाव से लेकर जनपद के जिलाधिकारी कार्यालय तक अपनी समस्या को लेकर फिर एक बार गुहार लगाई है इन ग्रामीणो को सरकारी तंत्र द्वरा केवल जांच का दिलासा जैसे शब्द के अलावा कुछ हांथ नही लगा है तो आखिर इन गरीब ओर लाचार लोगो की समस्या आखिर कब सुनी जाएगी ओर इन परिवारों को प्रदेश सरकार द्वारा भेजे गये राशन को इन परिवारों को दिया जायेगा दरअसल इन लोगो का कहना है हम लोग जब इस कोटेदार के यहा राशन लेने जाते है तो ये अंगूठा न मैच करने की वजह से राशन नही देता है तब इस पर बहेस शुरू हो जाती ओर इसी दौरान इस कोटेदार के लोग बंदूक के दम पर मारपीट को आमादा हो जाते है
जिसमे हाल ही मे पुलिस को भी आकर बीच बचाव करना पड़ा था तब जाकर मामला शांत हुआ था| तो आखिर ये परिवार लगातार अपनी समस्या अपने जनप्रतिनिधि और अधिकारियो से कर रहे है लेकिन कोई इनकी समस्या को सुनना तो चाहता है तो आखिर इसका हल कब होगा वही गाँव के लोग कहते है कि आखिर ऐसी सरकारों के क्या मायने जो गरीबो की समस्या का निदान नही कर सकती चुनाव आते है बड़ी बड़ी योजनाओ के पिटारे जनसभाओ के माध्यम से जनता के सामने रखी जाती लेकिन गाँव की भोली भाली जनता से वोट लेने के बाद ये नेता नही की ओर कभी गाँव को देखते भी तो आखिर इनकी समस्या का निदान किस तरह से हो सकता ये आज भी बड़ा प्रश्न बना हुआ है
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