ब्यूरो गोरखपुर - कृपा शंकर चौधरी
हल्की बारिश होने से गेहूं के साथ अन्य फसलों के लिए राहत हो गया है जबकि
बारिश के बाद यूरिया की मांग बढ़ने से इसकी कीमत में इजाफा हो गया है।
सुत्रो का मानना है कि कीमतों का एकाएक वृद्धि के पीछे छोटे व्यापारियों का
हाथ है।
गौरतलब है कि गेहूं की फसल के लिए कोहरे और
ठंड के साथ बारिश भी आवश्यक है जबकि गेहूं के बुआई के बाद से ही मौसम गर्म
होने से किसान भी थोड़ा चिंतित जरुर था। किन्तु गत दिन से रिमझिम बारिश
होने के कारण फसल एवं किसान दोनों खुश हैं साथ ही मौसम के तापमान में भी
गिरावट आई है। दूसरी ओर बारिश के बाद फसलों में छिड़काव के लिए यूरिया की
मांग बढ़ने से इसकी कीमत में इजाफा हुआ है और व्यापारियों के द्वारा
मनमाफिक दाम वसूला जा रहा है।
दरअसल गत दिनों यूरिया
की कमी का मार झेल चुके किसानों के लिए फिर खुसी के साथ दुख का भी सामना
करना पड़ रहा है। ध्यान रहे गत दिनों 299 रूपए यूरिया किसानों को 230 -250
रुपए में खरीदने पड़े थे और साथ में जिंक भी लेने अनिवार्य थे।
संबंधित
अधिकारियों द्वारा जल्द संज्ञान लेने से यूरिया के कमी पर तो कंट्रोल कर
लिया गया किन्तु वह कंट्रोलिंग दूरगामी परिणाम नहीं दिखा पाई और पुनः
कीमतें बढ़ कर 380 रूपए तक पहुंच गई है।
एक फुटकर
विक्रेता ने बताया कि कीमतों में बढ़ोतरी का जिम्मेदार केवल फुटकर विक्रेता
ही नहीं है क्योंकि ऊपर से ही भाव बढ़ा के मिलने के कारण हमें भी दाम बढ़ा
कर बेचने पड़ रहे हैं। कुलमिलाकर यूरिया की कीमत बढ़ने से किसानों के जेब
पर प्रभाव पड़ता दिख रहा है और अब यह देखना होगा कि सरकार बिचौलियों पर किस
प्रकार अंकुश लगाती है।

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