उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा सीटों पर गठबंधन से चुनाव लड़ने जा रही सपा -बसपा अपने गठबंधन का औपचारिक ऐलान 15 जनवरी को करने वाली है. इस गठबंधन को लेकर जहाँ चुनावी पंडित बीजेपी के लिए चिंता व्यक्त कर रहे हैं वहीँ बीजेपी इस मुद्दे पर चिंतित नहीं है. बीजेपी का कहना है कि सपा -बसपा और कांग्रेस के साथ चुनाव त्रिकोणीय होने वाला है जिसमे राज्य के परम्परागत वोटर्स बाँटेंगे जिससे बीजेपी को फायदा ही मिलेगा.
2019 के लोकसभा चुनावों के लिहाज से इस वक्त सबकी निगाहें उत्तर प्रदेश पर लगी हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि देश का प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका निर्धारण ये राज्य ही करता है. 80 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य से इस वक्त सबसे बड़ी खबर सपा-बसपा के संभावित गठबंधन की हो रही है. कहा जा रहा है कि बीजेपी को हराने के लिए धुर विरोधी सपा और बसपा के बीच गठबंधन हो गया है. अब उसका औपचारिक ऐलान 15 जनवरी को मायावती के जन्मदिन के मौके पर होना है. तब तक खरमास भी खत्म हो जाएगा. हालांकि 15 जनवरी को ही अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव का जन्मदिन भी पड़ता है.
विपक्षी खेमे में सपा-बसपा के संभावित महागठबंधन को इस लिहाज से गेमचेंजर माना जा रहा है क्योंकि जातीय आधार पर परंपरागत वोटबैंक के चलते कागजों पर ये गठबंधन बीजेपी से बीस दिखता है. चुनावों में वोट प्रतिशत की आंकड़ेबाजी के आधार पर भी राजनीतिक पंडित मोटेतौर पर आम सहमति दिखाते हैं कि इस महागठबंधन के होने पर बीजेपी को 2019 के लोकसभा चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. पिछली बार बीजेपी को यूपी की 80 में से 71 सीटें अपने दम पर मिली थीं और सहयोगी अपना दल के कारण एनडीए का आंकड़ा 73 तक पहुंच गया था.

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