रिपोर्ट - पुनीत मिश्रा
देश
मे गर्मी हो या फिर सर्दी चाय पीने वालों के लिए कोई भी मौसम मायने नहीं
रखता। अब तक आपने तुलसी की चाय, अदरक चाय, मसाला चाय का नाम सुना होगा
लेकिन अब एक नई चाय बाजार में आ गई हैं जिसे तंदूरी चाय कहते हैं। इस खास
चाय का स्वाद इतना लाजवाब है जिसे एक बार पीने के बाद आपकी इच्छा इसे
बार-बार पीने की होगी।यह सुनकर आपको थोड़ा अजीब जरूर लगा होगा लेकिन यह कोई
कहानी नहीं बल्कि असलियत है।इस समय मेला रामनगरिया में तंदूरी चाय का
स्वाद इनकी जुबां पर चढ़ा उतरने का नाम नहीं ले रहा। इस चाय
को बनाने लिए बड़े तंदूर की जरूरत होती है। इस तंदूर में छोटे मटके में
चाय की पत्ती डाली जाती है। यह खास चाय कुल्हड़ में परोसी जाती है। इस चाय
की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है।कुल्हड़ जब तंदूर में खूब गर्म हो जाता है
एवं चाय उबलने लगती है तो गरमा गरम चाय को कुल्हड़ में डालते हैं। यह दो
बार उबाल लेती है। पहले तंदूर एवं फिर कुल्हड़ की भीनी-भीनी खुशबू चाय में
मिल जाती है। जिससे मिट्टी का स्वाद उस चाय में भरपूर आ जाता है।उस चाय की
कीमत भी अन्य चाय से अधिक है जिसकी कीमत 15 रुपये रखी गई है। दुकानदार अपने
ग्राहकों के लिए तंदूरी चाय की पूर्ति नही कर पा रहा है।मेलारामनगरिया में
इस चाय की धूम मची हुई है।मिट्टी के स्वाद ने तंदूरी चाय को बनाया चाय का
किंग।इससे चाय स्पेशल हो जाती है और फिर सर्व करते हैं। हम तंदूरी चाय की
तरह ही तंदूरी कॉफी भी बनाते हैं।
आपको जानकर आश्चर्य होगा की इस चाय की
डिमांड मेला रामनगरिया में दिन पे दिन बढ़ती ही जा रही है.मेले में जो भी
लोग दूसरे जिलों से घूमने आते है वो इस मेले में लगे तंदूरी चाय पीने के
लिए जरूर पहुँचते हैं.
No comments:
Post a Comment
तहकीकात डिजिटल मीडिया को भारत के ग्रामीण एवं अन्य पिछड़े क्षेत्रों में समाज के अंतिम पंक्ति में जीवन यापन कर रहे लोगों को एक मंच प्रदान करने के लिए निर्माण किया गया है ,जिसके माध्यम से समाज के शोषित ,वंचित ,गरीब,पिछड़े लोगों के साथ किसान ,व्यापारी ,प्रतिनिधि ,प्रतिभावान व्यक्तियों एवं विदेश में रह रहे लोगों को ग्राम पंचायत की कालम के माध्यम से एक साथ जोड़कर उन्हें एक विश्वसनीय मंच प्रदान किया जायेगा एवं उनकी आवाज को बुलंद किया जायेगा।