रिपोर्ट - अशोक कुमार
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा है कि
प्रयागराज में हुए ऐतिहासिक और यादगार कुंभ के आयोजन से हताश पूर्व
मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया श्री अखिलेश यादव ने आंदोलन की
आड़ में पूरे उत्तर प्रदेश और खासतौर पर प्रयागराज को हिंसा की आग में
झोंकने की साजिश की, जिसे समय रहते प्रशासन की सूझ बूझ से नाकाम कर दिया
गया। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की शह पर समाजवादी पार्टी के
कार्यकर्ताओं ने ना सिर्फ सड़कों पर अराजकता का नंगा नाच किया बल्कि आम
लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी अभद्रता की। इतना ही नहीं
समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने महिला पत्रकारों तक से भी बदलसलूकी की।
इन घटनाओं के लिए सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही जिम्मेदार
हैं जिन्होंने विश्वविधालय प्रशासन के मना करने के बावजूद प्रयागराज
पहुंचने का दबाव बनाया और उसके बाद अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को प्रदेश
भर में हिंसा करने के लिए छोड़ दिया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी साधुवाद के
पात्र हैं जिन्होंने समाजवादी पार्टी की बदसलूकी बर्दाश्त करते हुए भी
अपना धैर्य नहीं खोया और बेहतर कानून व्यवस्था कायम रखी।
शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ऐसी ही अराजकता के लिए ही जानी
जाती है। बसपा सरकार के दौरान भी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ऐसी
ही अराजकता मचाई थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती जी की सरकारी होर्डिंग
जलाने के साथ ही स्कूल बसें तक जलाने की कोशिश की थी। इसी के बाद तत्कालीन
मुख्यमंत्री बहन मायावती ने समाजवादी पार्टी को गुंडों की पार्टी करार
दिया था। मंगलवार को भी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रयागराज में
ना सिर्फ सरकारी संपत्ति का बुरी तरह नुकसान किया बल्कि आम लोगों पर ईंट
पत्थर चलाकर उनकी जान के साथ भी खिलवाड़ किया। इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी
के कार्यकर्ताओं ने पुलिस के अधिकारियों के साथ खुलेआम अभद्रता भी की और
कुछ जगहों पर आगजनी करने की भी कोशिश की। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं
ने महिला पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी की जिसे पूरे देश ने देखा। ये
शर्मनाक और निंदनीय है। शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि 2015 में जिन नियमों के तहत योगी आदित्यनाथ जी को प्रयाग में विश्वविधालय के कार्यक्रम में जाने
से रोक दिया गया था, ठीक उन्हीं नियमों के तहत प्रयाग में विश्वविधालय ने
श्रीमान अखिलेश जी को भी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी। अखिलेश जी ने यह
झूठ भी बोला कि वे विश्वविधालय के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में जा रहे हैं तब
जबकि सभी को पता है कि विश्वविधालय में शपथ ग्रहण का कार्यक्रम छह अक्टूबर
को ही हो चुका था। यही नहीं एक छात्र के निधन के चलते छात्र शोकाकुल थे और
विश्वविधालय में किसी भी तरह के कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे। इसी मुद्दे
पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के चलते पिछले दिनों कैंपस में छात्रसंघ
महामंत्री शिवम सिंह पर बमों से हमला भी हुआ था। इन्ही विरोध प्रदर्शनों और
घटनाओे के चलते विश्वविधालय प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी।
ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश जी को पद की गरिमा देखते हुए स्वयं
प्रयागराज नहीं जाना चाहिए था। लेकिन ऐतिहासिक कुंभ से हताश अखिलेश जी ने
जानबूझ कर प्रयागराज पहुंच कर वहां माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। और इसके बाद
समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने कानपुर, आगरा, मेरठ, लखनऊ, गोरखपुर,
बरेली, प्रयागराज और वाराणसी में बलवा कर अराजकता कायम करने की कोशिश की
लेकिन प्रशासन ने सूझबूझ के साथ अप्रिय घटनाओं को टाल दिया।

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