रिपोर्ट - अशोक कुमार
भारतीय जनता पार्टीे के प्रदेश प्रवक्ता डाॅ. समीर सिंह ने भाजपा कार्यालय
पर पत्रकार बन्धुओं से वार्ता में कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन
द्वारा सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मना करने के बाद भी
विश्वविद्यालय में जाने की जिद करना उनकी बचकाना एवं गैर जिम्मेदाराना हरकत
को दर्शाता है। जहा एक तरफ प्रयागराज में भव्य एंव दिव्य कुंभ चल रहा है।
करोड़ों लोग स्नान करने जा रहे है। मुख्यमंत्री योगी जी कुंभ को सफल बनाने
का काम कर रहे है। वहीं अखिलेश यादव प्रयागराज के अंदर अराजकता और गुंडागर्दी को बढाने की राजनीतिक साजिश में लगे है। डाॅ. सिंह ने कहा कि जहां सपा सरकार में प्रदेश की उच्च शिक्षा का व
विश्वविद्यालय का स्तर खस्ताहाल था,
कैंपसों का इस्तेमाल सपा अपने राजनीतिक
स्वार्थ के लिए करती थी। वहीं भाजपा सरकार में उच्च शिक्षा में गुणात्मक
सुधार आया है। और विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता बढी है साथ-साथ लिंगदोह
समिति की सिफारिसों के अनुरूप विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में चुनाव
कराकर योगी जी ने छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित की है।
डाॅ. समीर सिंह ने कहा कि श्री अखिलेश यादव का यह आरोप कि दिसम्बर का निमत्रण था यह झूठ है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि लिंगदेाह के अनुसार राजनैतिक दलों के कार्यक्रमों पर पूर्णरूप से रोक हैं। यह बताता है कि अखिलेश यादव हिंसा की राजनीति में विश्वास रखते है उनका यह आरोप कि जो पंसद नही उनका एंकाउटर हो रहा है। मुख्यमंत्री के पद पर रहने के बाद उनका यह बयान मानसिक दिवालियापन की निशानी को दर्शाता है। अपराध और अपराधियों के दम पर राजनीति करने वाली तथा आंतकवाद और आंतकियों को समर्थन देने वाली सपा एनकान्टर पर सवाल खड़ा करती है। यह प्रमाणित करता है कि उनके ऐजेण्डे में किसान, नौजवान, गरीब, रोजगार, पढाई और दवाई नही बल्कि अपराधियों की चिंता ज्यादा है। माननीय योगी जी पर प्रश्नचिन्ह खडा करने वाले अखिलेश जी शायद यह भूल गए है कि अपने शासनकाल में 2007 में फर्जी मुकदमें लगाकर गोरखपुर की जेल में योगी आदित्यनाथ जी समेत सैंकडों भाजपा कार्यकर्ताओं को जेलों में बंद करने का काम इन्ही अखिलेश यादव जी की सरकार ने किया था। डाॅ. सिंह ने कहा कि आरोप लगाने से पहले अखिलेश जी को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए और अपने किये गए कृत्यों पर पश्चाताप करना चाहिए। सपा उत्तर प्रदेश को हिंसा की आग में झुलसाना चाहती है जो कि योगी जी के मुख्यमंत्री रहते कभी संभव नहीं हो पाएगा।
डाॅ. समीर सिंह ने कहा कि श्री अखिलेश यादव का यह आरोप कि दिसम्बर का निमत्रण था यह झूठ है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि लिंगदेाह के अनुसार राजनैतिक दलों के कार्यक्रमों पर पूर्णरूप से रोक हैं। यह बताता है कि अखिलेश यादव हिंसा की राजनीति में विश्वास रखते है उनका यह आरोप कि जो पंसद नही उनका एंकाउटर हो रहा है। मुख्यमंत्री के पद पर रहने के बाद उनका यह बयान मानसिक दिवालियापन की निशानी को दर्शाता है। अपराध और अपराधियों के दम पर राजनीति करने वाली तथा आंतकवाद और आंतकियों को समर्थन देने वाली सपा एनकान्टर पर सवाल खड़ा करती है। यह प्रमाणित करता है कि उनके ऐजेण्डे में किसान, नौजवान, गरीब, रोजगार, पढाई और दवाई नही बल्कि अपराधियों की चिंता ज्यादा है। माननीय योगी जी पर प्रश्नचिन्ह खडा करने वाले अखिलेश जी शायद यह भूल गए है कि अपने शासनकाल में 2007 में फर्जी मुकदमें लगाकर गोरखपुर की जेल में योगी आदित्यनाथ जी समेत सैंकडों भाजपा कार्यकर्ताओं को जेलों में बंद करने का काम इन्ही अखिलेश यादव जी की सरकार ने किया था। डाॅ. सिंह ने कहा कि आरोप लगाने से पहले अखिलेश जी को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए और अपने किये गए कृत्यों पर पश्चाताप करना चाहिए। सपा उत्तर प्रदेश को हिंसा की आग में झुलसाना चाहती है जो कि योगी जी के मुख्यमंत्री रहते कभी संभव नहीं हो पाएगा।
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