महेन्द्र मिश्रा ब्यूरो
भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि विपक्षी दल पहले सेना, शहीदों व उनके
परिजनों का अपमान करते हैं, तथा कुछ नेता अपने बयानों से आतंकवादी ताकतो को
बल देते है फिर आतंकवादियों के प्रति सम्मान सूचक संबोधन कर शहीदों का
अपमान करते है।भाजपा प्रवक्ता हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल
गांधी ने एक बार भी नहीं सोचा कि उनके द्वारा भारतीय सेना से सर्जिकल
स्ट्राइक व एयर स्ट्राइक का सबूत मांगने और सीआरपीएफ के 44 बहादुर जवानों
को शहादत के लिए जिम्मेदार अपराधी दुर्दांत आतंकवादी अजहर मसूद को
सम्मानजनक संबोधन कर शहीदों के परिजनों की घाव पर नमक छिड़कने का कार्य करते
है। सपा के नेता भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वायुसैनिकों द्वारा आतंकवाद के
संरक्षक पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों के शिविरों पर किये गये एयर स्ट्राइक
पर सवाल उठाते हैं।
अब ये लोग किस मुंह से शहीदों की बात करते हैं?उन्होंने कहा कि पुलवामा हमले में शहीद सीआरपीएफ जवान विजय कुमार मौर्य की
पत्नी ने विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा आतंकवादियों को सम्मानजनक संबोधन
से हुई अपनी पीड़ा उजागर की है। विपक्ष के नेताओं में देश पर जान लुटा देने
वाले इन जवानों के परिजनों के प्रति न तो कोई संवेदना है और न ही हमारी
सेना व अद्धसैन्य बलों के प्रति सम्मान। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
जैसा नेतृत्व है, जो आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस अपनाते हुये सीमा पार
आतंकियों को नष्ट करने का साहस रखते हैं। दूसरी ओर विपक्ष के नेता हैं, जो
ओछी राजनीति करते हुये विभाजनकारी व अलगवावादी ताकतों को शह दे रहे हैं और
आतंकवादियों के लिए सम्मानजनक संबोधन कर आतंकवादियों को मजबूती प्रदान करते
है। उन्होंने कहा कि देश की जनता इनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगी और
समाज व देश की एकता व अखंडता के लिये इनकी कारस्तानियों को उजागर करेगी।
जनता बतायेगी कि किस तरह कांग्रेस व कुछ दलों आतंकवादियों के प्रति लचर रूख
रखते है।प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि जनता यह भी जानना है कि बाटला हाउस मुठभेड़ में
मारे गये आतंकवादी की मौत पर आंसू बहाकर शहीद इंस्पेक्टर मोहन शर्मा की
शहादत का अपमान करने वाली कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्षा सोनिया गांधी के
नेतृत्व में विपक्ष के नेताओं की भूमिका क्या थी ? और कांग्रेस राज में किस
तरह धड़ल्ले से आतंकवादियों को छोड़ा गया था। सपा व बसपा गठबंधन को भी
बेनकाब करते हुए जनता को इस सच से रूबरू कराया जाएगा कि अखिलेश यादव की
सरकार ने आतंकवादियों को जेल से छोड़ने का आदेश जारी किया था, जिस पर उच्च
न्यायालय ने फटकार लगाते हुये ये आदेश रद्द कर दिया था।

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