अरविन्द शर्मा ब्यूरो
जहां ओर
पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ छात्र-छात्राओं के बेहतर भविष्य
और शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़
करने वाले शिक्षा माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्यवाही किये जाने का दावा कर
रहे हैं। वहीं दूसरी ओर न तो छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा और शिक्षा
व्यवस्था मिल पा रही हैं। यहीं नहीं शिक्षा माफिया बच्चों के भविष्य के
खिलवाड़ करते हुए उन्हे फर्जी प्रवेश और परीक्षा दिलवा रहे हैं। वहीं
जिम्मेदार कार्यवाही के करने के बजाए केवल जांच के नाम पर मात्र खानापूर्ति
भर कर रहे हैं। नतीजतन बच्चों को न्याय के लिए अधिकारियों के दर पर भटकना
पड़ रहा हैं। लेकिन वहां भी उन्हे मायूसी हाथ लग रही हैं।ऐसा ही एक मामला
यूपी के जनपद कानपुर देहात में देखने को मिला। जहां यशोदा कुंवर महिला
महाविद्यालय का भ्रष्ट स्कूल प्रबंधन ने छात्राओं को फर्जी परीक्षा प्रवेश
पत्र दे डाला और फर्जीवाड़े की इंतेहा तो जब हो गई जब कॉलेज प्रबंधन के
लोगों ने छात्राओं की फर्जी प्रवेश पत्र के सहारे बदस्तूर दो परीक्षाएं भी
संपन्न करा दी, मामले का खुलासा जब हुआ जब छात्राओं ने प्रवेश पत्र को
ऑनलाइन चेक किया और उसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। उसके बाद से छात्राएं
न्याय के लिए और उनके भविष्य के साथ खिलवाड करने वाले शिक्षा माफियाओं के
खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर अधिकारियों के दर पर भटक रही हैं। लेकिन
उन्हे न्याय तो दूर केवल आश्वासन देकर टरका दिया जा रहा हैं। तहसील से लेकर
जिला स्तरीय अधिकारियों के दर पर छात्राए गुहार लगा रही हैं।
मामला कानपुर देहात के भोगनीपुर तहसील के क्षेत्र यशोदा कुमार यादव महिला
महाविद्यालय श्री रामपुर का है जहां विश्वविद्यालय के द्वारा परीक्षाएं
संचालित है। विश्वविद्यालय की परीक्षा देने के लिए छात्राएं कॉलेज में आई
थी छात्राओं का आरोप है कि उनका पहला हिंदी का एग्जाम बिना प्रवेश पत्र के
ही दिला दिया गया और जब छात्राओं ने कॉलेज प्रबंधन से प्रवेश पत्र मांगा
तो उन्हें फर्जी प्रवेश पत्र फोटो कॉपी दे दिया गया और इसके बाद उसी फर्जी
प्रवेश पत्र के सहारे अगले दिन फिर बी ए प्रथम वर्ष का समाजशास्त्र की
परीक्षा संपन्न करवा दी संपन्न। छात्राओं को जब फर्जीवाड़े की जानकारी हुई
तो छात्राओं ने नेट पर प्रवेश पत्र का वेरिफिकेशन किया तो प्रवेश पत्र
फर्जी निकले जिस बात को लेकर छात्राओं ने हंगामा किया हंगामे के बाद से
कॉलेज प्रबंधन के लोग कॉलेज में ताला डाल कर फरार हो गए। तब छात्राओं ने
विद्यालय में जमकर हंगामा काटा और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
मामले को शांत कराने जब उप जिलाधिकारी भोगनीपुर राजीव राज कॉलेज में पहुंचे
और छात्राओं को शांत कराने की कोशिश की इसी दौरान उप जिलाधिकारी भोगनीपुर
ने छात्राओं को मिट्टी का तेल डालकर आग लगा लेने की हिदायत दे डाली।
छात्राओं का आरोप है कि उप जिला अधिकारी ने कहा कि अगर आग लगाना है तो
मिट्टी का तेल व स्वयं दे देंगे।
इस बात से आक्रोशित छात्राओं ने आज तहसील
भोगनीपुर पहुंचकर एसडीएम कोर्ट में घुसकर जमकर हंगामा काटा और कॉलेज
प्रबंधन, प्रशासन और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासन से मिट्टी
का तेल की मांग की। बच्चियों को निर्देश देख पुखरायां तहसील के अधिवक्ताओं
ने भी उनका समर्थन किया, इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने तहसील में स्ट्राइक
करवा दी। छात्राएं अभी तक तहसील परिसर में ही धरना देकर बैठ गई और कानूनी
कार्रवाई की मांग करने लगे। लेकिन उन्हे वहां न्याय नहीं मिला। जिसके बाद
छात्राएं जिले के आलाधिकारियों के पास पहुची और शिक्षा माफियाओं के खिलाफ
कड़ी कार्यवाही करने की मांग करने लगी। यूपी
में प्रदेश के मुख्य मंत्री सर्व शिक्षा अभियान चलाकर सब पढ़े सब बढ़े का
नारा लगाकर सबको शिक्षा का अधिकार देने की बात कर रहे हैं तो वहीं कानपुर
देहात में शिक्षा के नाम बच्चों के साथ हुए शिक्षा के नाम पर खिलवाड़ खिलवाड़
में बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है और शिक्षा माफिया मौज काट रहे
हैं पीड़ित विद्यार्थियों का कहना है कि उनका बोर्ड का एग्जाम चल रहा है पर
स्कूल में शिक्षा माफियाओं की दबंगई के आगे कोई भी अधिकारी कार्रवाई से बच
रहा है और बच्चे फर्जी प्रवेश पत्र लेकर विद्यार्थी तहसील से लेकर
जिलास्तरीय अधिकारियों तक न्याय की गुहार लगा रहे हैं पर उनकी सुनने वाला
कोई नहीं है। कहने को तो शिक्षा सबका अधिकार है पर शिक्षा माफिया कहीं ना कहीं आज भी
हावी है वहीं जिम्मेदारों से जब न्याय की गुहार लगाई जाती हैं तो उनका
बेतुका बयान और कथन बच्चों का मनोबल गिरा देता हैं और शिक्षा माफियाओं के
हौसले बुलन्द कर रहा हैं। इन बच्चों की माने तो वह जब तहसील में एसडीएम के
पास प्रवेश पत्र फर्जी होने और न्याय की गुहार लगाने गए तो एसडीएम ने खुद
उल्टा उन्हें यह कहकर वहां से भगा दिया कि तुम इलाहाबाद पेपर देने जाओ यहां
प्राइवेट एग्जाम क्यों दे रहे हो वही पीली बच्चों की जब तहसील में कोई
सुनवाई ना हुई तो सारे बच्चे एकजुट होकर भोगनीपुर थाने पहुंच गए और पुलिस
ने मामला दर्ज कर कार्रवाई की बात करने लगे वहीं पुलिस ने बच्चों की लिखित
तहरीर पर जांच कर कार्रवाई करने की बात कर रही है ऐसे में समझा जा सकता है
कि प्रदेश के मुखिया शिक्षा माफियाओं पर अंकुश लगाने के लाख दावे कर रहे हो
पर शिक्षा माफिया आज भी कहीं ना कहीं हावी है।
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