ब्यूरो कानपुर रवि गुप्ता
कानपुर नगर में आगामी 29 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चुनाव में अब केवल
14 प्रत्याशी ही चुनावी मैदान में अपना भाग्य आजमा सकेंगे। 43 वीं लोकसभा
में प्रत्याशियों द्धारा दाखिल किये गए नामांकन पत्रों में खामिया मिलने के
बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने 13 उम्मीदवारों का नामांकन निरस्त कर दिया
है | कानपुर लोकसभा से अब तक 27 प्रत्याशियों ने अपना नामांकन कराया था
जिसमे अब केवल 14 प्रत्याशी ही चुनाव लड़ सकेंगे | जिसमे प्रगतिशील समाजवादी
पार्टी (लोहिया )के प्रत्याशी का नामांकन भी दस्तावेज़ों में खामियों की
वजह से रद्द कर दिया गया हैं जिसकी वजह प्रत्याशी ने प्रेसवार्ता के जरिये
जिला निर्वाचन अधिकारी निशाने पर लेते हुए विजय विश्वाश पंत पर बीजेपी से
मिलीभगत कर का जबरन नामांकन पत्र रद्द करने का आरोप लगाया है | अब
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अपना नामांकन रद्द होने से
हाईकोर्ट की शरण में जा रहे है | आपको बता दें कि कानपुर नगर में 43 वीं
लोकसभा चुनाव के लिए 2 अप्रैल को नामांकन की प्रक्रिया शुरू की गयी थी |
जिसमे 2 से 9 अप्रैल तक 27 प्रत्याशियों ने अपना नामांकन कराया था | जिला
निर्वाचन अधिकारी के नेतृत्व में 10 अप्रैल को जब सभी प्रत्याशियों की
स्कूटनी की गयी तो 13 उम्मीदवारों के नामांकन फ़ार्म में काफी खामिया मिली
जिसकी वजह से उनका नामांकन रद्द कर दिया गया | रद्द किये गए नामांकनों में
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राजीव मिश्रा भी थे,,जब उन्हें पता चला की
उनका भी नामांकन रद्द कर दिया गया है तो उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी पर
बीजेपी से मिलीभगत का आरोप लगाया | राजीव मिश्रा का आरोप है कि 8 तारीख को
अपने समर्थको के साथ जिला मुख्यालय कराने पहुंचे थे | जिलाधिकारी के कक्ष
के बाहर दो घंटो तक प्रस्तावक समेत कई लोग पानी के लिए परेशान हो रहे थे |
अधिकारियो से पानी की व्यवस्था करने के लिए कहा गया तो उन्होंने असमर्थता
जताई जिस पर सभी लोग धरने पर बैठ गए | जबकि सत्ता पक्ष के प्रत्याशी जब
नामांकन कराने पहुंचे थे तब उन्हें प्राथमिकता दी गयी थी | राजीव मिश्रा का
कहना है कि हमने तीन सेट नामांकन पत्र दाखिल किये थे लेकिन जिलाधिकारी ने
अवैधानिक तरीके से नामांकन रद्द कर दिया अब हम सभी उच्च न्यायालय की शरण
में जाएंगे | राजीव मिश्रा ने आरोप लगाया है कि जिस तरह से 13 प्रत्याशियों
का नामांकन रद्द किया गया है उससे लगता है की जिला प्रशाशन सत्ता पक्ष के
दबाव में आकर काम कर रहा है

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