प्रदीप श्रीवास्तव/निजामाबाद,तेलंगाना
17वीं लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण के मतदान में तेलंगाना की निजामाबाद जिले में लगभग 60% से अधिक लोगों ने मतदान किया। निजामाबाद जिले का यह मतदान अपने आप में इस लिए महत्व रखता है कि इस संसदीय क्षेत्र से 1,2,3 या 10 नहीं पूरे 185 प्रत्याशी के भाग्य आजमा रहे हैं। जिसमें मुख्य टक्कर तेलंगाना राष्ट्र समिति की प्रत्याशी पूर्व सांसद के कविता एवं भाजपा के डी अरविंद के बीच है । कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व सांसद मधु आशिकी गौड़ की स्थिति नगण्य के बराबर है ।
पता हो कि इस संसदीय क्षेत्र से 11,53,684 मतदाता हैं । जिनमें 5 लाख 49 हजार पुरुष मतदाता और 60,3,897 महिला मतदाता शामिल है । 2014 के सदीय चुनाव की मद्दे नजर इस बार 58,877 मतदाताओं की संख्या बढ़ी है जिसमें काफी संख्या युवाओं की है जिन्होंने इसी वर्ष 19 वर्ष की आयु पूरी की है। यह संसदीय क्षेत्र विश्व के चुनाव प्रणाली में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं ।भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में यह पहली बार है जब एक ही संसदीय क्षेत्र से एक साथ इतने प्रत्याशी चुनावी दंगल में कूदे हैं। निजामाबाद संसदीय क्षेत्र ( जिसके अन्तर्गत निजामाबाद शहर, ग्रामीण, आरमूर ,बोधन,बालकोंडा एवं बांसवाड़ा विधान सभा क्षेत्र आते हैं ।) से तेलंगाना राष्ट्र समिति के के 'कार' चुनाव चिन्ह से प्रदेश के मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी पूर्व सांसद के. कविता है वहीं उनके सामने कभी आंध्र प्रदेश के इस (तेलंगाना बनने से पूर्व)क्षेत्र से दबंग राजनीतिक डी श्रीनिवास के छोटे बेटे डी. अरविंद पहली बार अपना भाग्य आजमा रहे हैं।
वहीं कांग्रेस की ओर से दो बार सांसद रहे मधु याश्की गौङ भी चुनावी मैदान में है ।लेकिन वह बेमन से चुनाव लड़ रहे हैं ।राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि तेलंगाना की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए वह चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे लेकिन दो बार सांसद होने की वजह से हाईकमान ने उन्हें जबरन यहां से चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया ।स्थानीय लोगों का कहना है कि मधु ने यहां पर कोई चुनाव प्रचार जैसा काम नहीं किया , क्योंकि उनको मालूम था कि उनका क्या हश्र क्या होगा । मुख्य लड़ाई भाजपा और तेरस के बीच ही है ।लेकिन प्रश्न यह उठता है कि इस बार ऊंट किस करवट बैठेगा इसके पीछे जो आकलन किए जा रहे हैं उसके मुताबिक पूर्व सांसद के कविता से स्थानीय किसान बहुत ही नाराज हैं ।
इस नाराजगी के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि उन्होंने इस हल्दी व गन्ने बाहुल्य वाले क्षेत्र में सरकार से हल्दी गठन बोर्ड की स्थापना नहीं करवा पाई ।जिसकी मांग स्वतंत्रता के बाद से किसान बराबर करते आ रहे हैं ।इसलिए अंतिम क्षण में 177 किसानों ने कविता के खिलाफ वोट काटने के लिए मैदान में उतरने का फैसला लिया और नामांकन किया । इस बीच इतने प्रत्याशियों के नामों को लेकर चुनाव आयोग भी चिंतित हो उठा कि कैसे चुनाव कराए जाएं । क्योंकि एक ईवीएम मशीन में अधिक से अधिक 12 से 16 नामों को ही सम्मिलित किया जा सकता है, लेकिन प्रत्याशियों की संख्या को देखते हुए आज हर पोलिंग बूथ पर 12 ईवीएम मशीनों का प्रयोग किया गया जिसके लिए चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया से विशेष आग्रह पर 26,820 ईवीएम मशीन और उनके लिए 2,240 कंट्रोल यूनिट स्थापित की गई ।
हर पोलिंग बूथ के बाहर बड़े फ्लेक्स पर सभी 185 प्रत्याशियों के नाम उनकी फोटो को बैलट बॉक्स ईवीएम मशीन के अनुसार अंकित किया गया था ।जिससे मतदाताओं को असुविधा ना हो मतदाताओं के मुताबिक पहले नंबर पर भाजपा दूसरे पर तेरास एवं तीसरे नंबर पर कांग्रेस की प्रत्याशी का नाम और चुनाव चिन्ह बना हुआ था।उसके बाद शेष के ।
निजामाबाद संसदीय क्षेत्र का यह चुनाव विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज भी किया जा चुका है ।

वास्तव में ये तो विश्व रिकॉर्ड ही बन गया ..इसका मतलब सभी 177 किसान प्रत्याशी के कविता के वोटों को प्रभावित करेंगे ...
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