तहकीकात न्यूज़ डेस्क
दिल्ली की कुर्सी उत्तर प्रदेश से होकर जाती है। इस प्रदेश के चुनाव का अपना अलग ही पैमाना होता है। सीधे तौर पर कहा जाता है कि देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक का रास्ता यूपी के सियासी गलियारों से होकर पहुंचता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है।
यूपी में सपा बसपा गठबंधन को झटका लगा है।साल भर पूर्व सूबे के मुखिया के अभेद किला समझा जाने वाला गोरखपुर क्षेत्र से निषाद पार्टी ने जीत कर सियासी गलियारों में हलचल मचा दिया था।पंरतु राजनीति ने करवट बदला तो सूबे में निषाद पार्टी और बीजेपी के बीच गठबंधन हो गया है। इसके साथ ही गोरखपुर से सांसद प्रवीण निषाद बीजेपी में शामिल हो गए हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के समर्थन का ऐलान करने के सिर्फ़ तीन दिन बाद उससे नाता तोड़ लेने वाली निषाद पार्टी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर गठबंधन की अपनी सहयोगी बसपा प्रमुख मायावती के दबाव में काम करने का आरोप लगाया था।
यूपी के गोरखपुर से सांसद
सांसद प्रवीण निषाद समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।2019 का चुनाव का डंका बजा तो अबकी बार अखिलेश-माया गठबंधन के बाद साइकिल की सवारी करने से सीधे तौर पर इनकार कर दिया है
बीते मंगलवार को निषाद पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा था, 'अखिलेश यादव मायावती के दबाव में काम कर रहे हैं। यही कारण था कि गोरखपुर और महराजगंज सीटें देने का भरोसा दिलाने के बावजूद सपा अध्यक्ष ने मेरे साथ छल किया।'
पंरतु सपा प्रमुख 'अखिलेश ने बाद में मुझे दो के बजाय एक सीट देते हुए सपा के चुनाव निशान पर लड़ने को कहा। यह मुझे मंजूर नहीं था। जिसके कारण निषाद पार्टी के चुनाव चिह्न 'भोजन भरी थाली' पर चुनाव लड़ना चाहता था। मगर ऐसा नहीं हो सका। मुझे अखिलेश और मायावती दोनों ने ही ठगा। लिहाजा, मुझे अलग होने का निर्णय लेना पड़ा।'
उन्होंने कहा कि सपा के निशान पर निषाद पार्टी के प्रत्याशी के चुनाव लड़ने की बात से दल के कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष था और उन्होंने पार्टी छोड़ना शुरू कर दिया था।
मालूम हो कि निषाद पार्टी ने सपा-बसपा-रालोद महागठबंधन को समर्थन देने का ऐलान करने के तीन दिन बाद 29 मार्च को अचानक अपना इरादा बदलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी।
निषाद पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद ने पिछले साल गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की थी। उस उपचुनाव में बसपा ने भी निषाद का समर्थन किया था। लेकिन अब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर लिया है।
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