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Wednesday, 3 April 2019

अपने जन्मदिन पर जयाप्रदा ने किया नामांकन, कहा- मुझे मिल गया सबसे बड़ा गिफ्ट

रामपुर से भाजपा की उम्मीदवार जयाप्रदा ने बुधवार को लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मैं जहां काम करना चाहती हूं। वहां से मुझे प्रत्याशी बनाया गया है। ये मेरे लिए आज मेरे जन्मदिन का सबसे बड़ा गिफ्ट है।रामपुर सीट पर उनके सामने सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां चुनावी मैदान में हैं। यह उनका प्रभाव क्षेत्र माना जाता है।जयाप्रदा का राजनीतिक करिअरइसके पहले भी भाजपा के टिकट पर जयाप्रदा 1994 में रामपुर में सियासत के मैदान में उतरी थीं। उन्होंने तेलगूदेशम पार्टी से राजनीति शुरू की। चंद्रबाबू नायडू ने इन्हें राज्यसभा भेजा। पर, बाद में वह सपा में आ गईं।आजम खां ने ही 2004 में जयाप्रदा को रामपुर से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया। घर-घर वोट मांगे और जयाप्रदा सांसद हो गईं। पर, सपा की सियासत में अमर सिंह का प्रभाव बढ़ने के साथ ही जयाप्रदा और आजम के बीच रिश्ते बिगड़ते चले गए।




अमर सिंह और आजम खां तो वैसे भी एक-दूसरे के विरोधी थे। लिहाजा जयाप्रदा अमर के खेमे में खड़ी हो गईं। 2009 के चुनाव में आजम खां ने कोशिश की कि जया को टिकट न मिले। पर, अमर सिंह ने मुलायम सिंह यादव से जया को टिकट दिलवाकर आजम को झटका दिया। आजम ने जया का विरोध किया तो वह सपा से बाहर कर दिए गए। जया रामपुर से फिर सांसद चुन ली गईं। बाद में अमर सिंह भी सपा से बाहर हुए और उनके साथ जयाप्रदा भी।

रालोद से भी चुनाव लड़ चुकी हैं जयाप्रदा
2014 के लोकसभा चुनाव में जयाप्रदा रालोद के टिकट पर बिजनौर से लड़ीं, लेकिन जीत नहीं सकीं। विधानसभा चुनाव 2012 में आजम सपा में वापस आ गए तो 2014 के बाद अमर सिंह की भी सपा में एंट्री हो गई। हालांकि अमर और आजम एक ही पार्टी में होने के बाद भी एक-दूसरे पर शब्दबाण चलाते रहे।मुलायम सिंह यादव के कुनबे में वर्चस्व की जंग ठनी तो अमर, मुलायम व शिवपाल के साथ खड़े हुए। बाद में समीकरण बिगड़े तो अमर ने अपनी छवि हिंदूवादी नेता की बनानी शुरू कर दी।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी शुरू कर दी। तकनीकी रूप से तो अमर अब भी सपा के राज्यसभा सदस्य हैं, पर वह सार्वजनिक रूप से कई बार अखिलेश यादव को चुनौती दे चुके हैं कि वह उन्हें बर्खास्त कर दें।साफ है कि रामपुर में इस बार जया उन्हीं आजम खां का मुकाबला करेंगी जिन्होंने कभी उनके लिए वोट मांगे थे। अमर सिंह भले ही चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन रामपुर के मैदान में आजम से असली मोर्चा उनका ही होगा।

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