रिपोर्ट - रीतू श्रीवास्तव
भाजपा नेता व पूर्व मंत्री के समर्थक की हत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के
मामले में पुलिस के जरिए लगायी गयी हत्या की धारा पर संज्ञान लेते हुए
एडीजे चतुर्थ की अदालत ने स्पष्टीकरण के लिए थानाध्यक्ष धम्मौर को तलब किया
था। कोर्ट के आदेश पर थानाध्यक्ष तलब हुए, लेकिन उनके जवाब से कोर्ट
संतुष्ट नहीं हुई और मिथ्या साक्ष्य इकट्ठा करने का मामला दर्ज कर
थानाध्यक्ष को घंटों कस्टडी में रखते हुए संबंधित कोर्ट को मामला ट्रांसफर
कर दिया। फिलहाल सीजेएम आशारानी सिंह ने सेशन कोर्ट के जरिये की गयी
कार्यवाही को परिवाद के रूप में न बनता मानते हुए थानाध्यक्ष को निजी
मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।मालूम हो कि धम्मौर थाना क्षेत्र स्थित
खलेसरपुर नहर फाटक पिकौरा के पास हुई घटना का जिक्र करते हुए पुलिस ने
आरोपी हैदर अब्बास उर्फ गब्बर,सैय्यद गाफिर हसन निवासीगण मनियारपुर-कुड़वार
को गिरफ्तार किया।पुलिस के मुताबिक जेल में निरुद्ध रहने के दौरान हैदर
अब्बास का जामो थाना क्षेत्र के रहने वाले बब्लू सिंह उर्फ उदय भान से
संपर्क बन गया।बब्लू सिंह की पूर्व मंत्री व भाजपा नेता जंग बहादुर सिंह
एवं उनके समर्थक प्रदीप सिंह उर्फ पहाड़ी से रंजिश चल रही है। थानाध्यक्ष
प्रवीण सिंह के आरोप के मुताबिक प्रदीप सिंह उर्फ पहाड़ी को जान से मारने के
लिए बब्लू सिंह ने पांच लाख रूपये में सौंदा कर लिया था। वारदात को अंजाम
देने के लिए हैदर अब्बास व उसके सहयोगी ने पूरी योजना भी तैयार बना ली थी।
इतना ही नहीं वारदात को अंजाम देने के लिए एक आरोपी को जेल से बाहर
निकलवाने को लेकर बब्लू सिंह ने जमीदारों की भी व्यवस्था करायी थी। इस
मामले में हैदर अब्बास,सैय्यद गाफिर हसन,अजय चैहान,बब्लू सिंह उर्फ
उदयभान,शैलेंद्र प्रताप सिंह,बजरंग बहादुर सिंह पर नामजद एवं चार अज्ञात
जामिंनदारों के विरुद्ध भादवि की धारा 115 व 302 में मुकदमा पंजीकृत हुआ
है। मामले में आरोपियो को विवेचक विपिन कुमार सिंह की मांग पर सीजेएम कोर्ट
ने इन्हीं धाराओं में रिमांड स्वीकृत कर जेल भेजने का आदेश भी दिया। मामले
से जुड़े आरोपी बजरंग बहादुर समेत अन्य ने हाईकोर्ट की भी शरण ली है। मिली
जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट ने भादवि की धारा 115 के साथ 302 लगाने के
संबंध में पुलिस विभाग से जवाब-तलब भी किया।इसी मामले में आरोपी हैदर
अब्बास की तरफ से पड़ी जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान एडीजे चतुर्थ की
अदालत ने बीते 18 अप्रैल को संज्ञान लेते हुए बगैर किसी की हत्या हुए या
हत्या जैसे अपराध को कारित किये बगैर ही धारा 302 लगाने के संबंध में
थानाध्यक्ष धम्मौर को व्यक्तिगत रूप से 19 अप्रैल के लिए तलब कर जवाब मांगा
था। जिसके बाद कोर्ट के आदेश के अनुपालन में थानध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह
लगातार कई तिथियों पर जवाब देने के लिए अदालत पहुंचे, लेकिन सुनवाई न हो
पाने के कारण मामले में तारीखें पड़ती रहीं। इसी क्रम में शुक्रवार को नियत
तिथि पर थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह कोर्ट में तलब हुए, जिनके स्पष्टीकरण
से एडीजे चतुर्थ मनोज कुमार शुक्ल की अदालत संतुष्ट नहीं हुई और झूठा
साक्ष्य तैयार करने के आरोप में थानाध्यक्ष को कस्टडी में ले लिया। कोर्ट
की इस कार्रवाई से थानाध्यक्ष के पसीने छूट गये।कोर्ट की इस कार्यवाही की
जानकारी होने पर पहुँचे पुलिस महकमें के बड़े अधिकारी थानाध्यक्ष की पैरवी
में घण्टो जुटे रहे। अदालत ने थानाध्यक्ष के खिलाफ भादवि की धारा 194 व 195
का केस दर्ज करते हुए मामला संबंधित अदालत के सुपुर्द कर दिया। जिसके बाद
एडीजे चतुर्थ के जरिये की गयी कार्रवाई को सीजेएम आशारानी सिंह ने संज्ञान
के बिन्दु पर सुनवाई के दौरान ही परिवाद के रूप में न होना पाते हुए
थानाध्यक्ष को 50 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। जिसके
बाद निजी मुचलके पर थानाध्यक्ष कस्टडी से बाहर हुए, तब जाकर कोर्ट की
कार्रवाई से बौखलाये पुलिस महकमें ने राहत की सांस ली।
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