रिपोर्ट - रीतू श्रीवास्तव
जिस स्कूल में जाने तक के लिए सड़क नही,छात्र-छात्राओं के शौच के लिए शौचालय नही,सफाई के नाम पर शून्य।
किसी ने आज तक उसे देखा तक नही,अध्यापक को मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री,राष्ट्पति तक का नाम ठीक से पता नही क्या वहाँ सुधरेगा इन छात्रों का भविष्य,आखिर आज तक क्यों नही बन सका विद्यालय की चहर दीवारी और सड़क,मजे की बात जहाँ चहरदीवारी के बिना बच्चे नही सुरक्षित उसी स्कूल को बनाया गया पोलिंग बूथ,आखिर लोग क्यों अपने बच्चों का दाखिला नही करवाना चाहते सरकारी स्कूलों में,आखिर क्यों गिर रहा सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर,रजिस्टर में अंकित किये जाते है 50 से 60 बच्चों की संख्या और उपस्थिति होती है 10 से 20 आखिर क्या है वजह,इसी का हाल जानने के लिए जब हमारी सुल्तानपुर जिले की टीम पहुंची लम्भुआ विकाशखण्ड के पथरा के प्राथमिक स्कूल में तो हकीकत जानकर खुली रह गई हमारी आंखे।
पूरे स्कूल में गंदगी का अम्बार रसोइया भी गंदगी भरे कमरे में बच्चों का मिड डे मील तैयार कर रहीं थी जली हुई सोयाबीन की सब्जी रोटी बनाती रसोइया से हमारी टीम ने पूछा कि सब्जी जल गई है तो जवाब मिला क्या कर सकती हूं सब खा लेंगे,प्रधानाध्यापक से पूंछने पर पता चला जब बन जाता है तो हम चेक करके ही बच्चों को खिलाते है मेरी टीम की समझ नही आरहा था कि क्या इस 2 किलो आटे में और 1-2 किलो सब्जी में 20 छात्र के साथ प्रधानाध्यापक कैसे भोजन करेंगे,सफाई के नाम पर कूडो का ढेर लगा रहा,बच्चे खुद सफाई करते दिखे उनका कहना है कि सफाई कर्मी कभी नही आता वो प्रधान खास है उन्ही के साथ ही रहता है कई बार शिकायत की गई लेकिन प्रधान के हस्तछेप के बाद कुछ नही हो सकता।
क्या कहते है सफाई कर्मी विनोद गुप्ता-
विनोद गुप्ता से फोन पर सम्पर्क किया गया तो उनका कहना था कि मुझे चोट लगी है मै 5-6दिन से ही नही जा पाता जब टीम ने बताया कि वहां कभी आप जाते ही नही तो,और आपको चोट लगी है तो क्या आपने छुट्टी ली तो एक बार बोले हॉ उनसे जवाब मांगा गया कि कहाँ से डीपीआरओ, या बीडीओ के यहाँ से तो उनका कहना था छुटटी लिया नही हु,वैसे ले दे कर चल जा रहा है,यह हाल सफाई कर्मी का है,
क्या कहते है वीडियो लम्भुआ अमरनाथ -
वीडियो से सफाई कर्मी के बारे में पूंछे जाने पर वीडियो लम्भुआ का दो टूक जवाब था कि ऐसी शिकायत है आप लोग हमें बताते रहिये हम कार्यवाही करेंगे,वो छुट्टी नही लिया है ना ही मेडिकल लगाया है,मै सफाई कर्मी को नोटिस देते हुए,15 दिन का वेतन काट देरहा हूँ,तब उसकी समझ मे आयेगा
अब बात यह उठती है कि ऐसे स्कूलों में क्यों लोग अपने बच्चो
को भेजे क्या उनको स्कूलो में झाड़ू लगाने के लिए या फिर उन्हें पढ़ने के
लिए,सरकारे बदली, नियम कानून बदला,कागजो पर आदेश बदले लेकिन यूपी के राम
राज्य में स्कूलों का हाल जस का तस रहा,इसी का फायदा प्राइवेट स्कूल उठाते
है,मनमाने ढंग से पैसा वसूलते है,एक जगह सरकारी स्कूलों में 2 से 6 टीचर
बीएड,बीटीसी करके 1 से 5 तक के 15-20 बच्चों पढ़ते है और सरकार उनपर लाखो
रुपये बेतन के तौर पर न्यौछावर करती है,दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूलों में
बी0ए0,एम0ऐ0 करके 3से 5 हजार पाते है टीचर लेकिन 500 से ऊपर ही बच्चे रहते
है,शिक्षा विभाग के छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों को सब पता है,लेकिन सभी ले
दे कर इस खेल में शामिल है,यही कारण है कि सब कुछ जानते हुए भी अधिकारी
कोई कदम नही उठाते और बच्चों के भविष्य के साथ खेल खेलते है,देखते है कि
बीडीओ लम्भुआ सफाई कर्मी विनोद के ऊपर कार्यवाही करते है या फिर किसी दबाव
में मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते है


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