वह खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्पेशल सुरक्षा में तैनात होकर प्रमुख सचिव के पद पर होना बताती थी। इसको देखते मेरठ पुलिस ने जोया खान को पीएसओ (प्राइवेट सिक्योरिटी ऑफिसर) दरोगा मोहम्मद आसिफ दिया हुआ था। उसके साथ पुलिस की एस्कॉर्ट भी चलती थी। मेरठ समेत कई जिलों की पुलिस जोया खान को ऑफिसर समझकर वीआईपी सुविधा देती थी। जोया खान करीब सात साल से निशांत निवासी वाराणसी के साथ रहती थी।जोया खान का नोएडा में भी फ्लैट बताया गया है। जोया खान ने वीआईपी सुविधा न मिलने पर एसएसपी नोएडा को हड़काया था। जिस पर एसएसपी नोएडा वैभव कृष्ण को शक हुआ। एसएसपी के निर्देश पर नोएडा पुलिस जोया खान के फ्लैट में पहुंची। शुरूआत में जोया खान ने पुलिस को आड़े हाथों ले लिया। जब पुलिस ने फ्लैट में तलाशी लेनी शुरू की तो पोल खुल गई। पुलिस ने जोया खान को गिरफ्तार कर लिया। फ्लैट से एपल के 4 लैपटॉप समेत अन्य सामान को पुलिस ने कब्जे में लिया। पुलिस ने निशांत को भी हिरासत में लिया है।
पुलिस का कहना कि निशांत का पिता कानपुर में एक विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर है। नोएडा पुलिस ने मंगलवार रात मेरठ में छापा मारकर जोया खान के घर से दो लग्जरी गाड़ी बरामद की हैं।पोल खुली, हैरत में अफसर जोया खान की पोल खुलने पर पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी हैरत में पड़ गए। तीन साल से पुलिस अधिकारियों को धोखा देकर वीआईपी सुविधा महिला ने ली। सवाल तो सरकारी सिस्टम पर भी उठता है। पुलिस प्रशासन ने एक बार भी जांच करने की जहमत नहीं उठाई कि जोया खान कौन है और कौन से विभाग में तैनात है। सवाल एक जनपद के अधिकारियों से नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की समूची सरकारी मशीनरी से है। अफसरों की जांच होना चाहिए कि आखिर फर्जी महिला आईएफएस अफसर को कैसे सुविधा मुहैया करा दी।
पीसीएस की परीक्षा में विफल होने पर बनाया प्लान
पीसीएस की परीक्षा में विफल होने पर बनाया प्लान
पुलिस की पूछताछ में निशांत और जोया खान ने बताया है कि पढ़ाई करने के बाद उन्होंने 2007 में पीसीएस की परीक्षा दी थी। जिसमें वह विफल हो गए थे। जिसके बाद दोनों ने प्लानिंग बनाई। जोया खान फर्जी आईएफएस बन गई। इसको लेकर दोनों ने साइबर अपराध किया। पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को धोखा देने और उन पर विश्वास कायम करने के लिए अपने मोबाइल में कई एप डाउनलोड किए थे। जिससे वह फोन पर बातचीत करती थी। वाइस चेंजिंग और मोबाइल स्क्रीन पर सीयूजी नंबर दर्शाकर अधिकारियों से बात करते थे
क्या है आईएफएस
देश की सर्वोच्च सिविल सर्विसिज परीक्षा में टॉप करने वाले अभ्यर्थियों को भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) में जाने का मौका मिलता है। आईएएस और आईपीएस से आईएफएस की रैंक ज्यादा होती है। जोया खान खुद को आईएफएस अफसर बताकर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को आसानी से धोखा देती रही। किसी अफसर ने तीन साल से उसके बारे में जानकारी करना भी मुनासिब नहीं समझा। जोया का फोन आते ही उसको वीआईपी सुविधा मुहैया कर देते थे।
एनआईए तलाश रही जोया के राज
पुलिस सूत्रों के मुताबिक जोया के लैपटॉप में कई ऐसी जानकारी मिली हैं, जिससे सुरक्षा संबंधित कई राज खुले हैं। उसने अफगानिस्तान को भी संदेश भेजे हैं। जोया का मकसद क्या था, इसको जानने के लिए सुरक्षा एजेंसियां भी जोया से पूछताछ करने में जुटी हैं। एनआईए ने नोएडा में जाकर जोया से पूछताछ की है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जोया का कनेक्शन पाकिस्तान से तो नहीं है, इसकी सुरक्षा एजेंसियां जांच पड़ताल करने में जुटी हैं।खुद को आईएफएस अफसर बताने वाली एक महिला को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। महिला आईएफएस बताकर करीब तीन साल से मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद सहित कई जिलों के पुलिस अधिकारियों को धोखा देकर वीआईपी सुविधा ले रही थी। उसके साथ ही सरकारी गनर व एस्कॉर्ट चलती थी।महिला के विदेश में भी कनेक्शन है, इसकी पोल खुलने पर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। महिला ने कानपुर में एक ज्वाइंट कमिश्नर के बेटे से शादी की है, उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। महिला मेरठ के एक डॉक्टर की बेटी है और उसके मेरठ, दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा समेत कई जगह फ्लैट हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेरठ यात्रा के दौरान इस फर्जी अफसर ने दो पुलिस एस्कॉर्ट ले ली थी। यह पीएम की सुरक्षा में चूक का एक बड़ा मामला है। कैंट स्थित तिवारी कंपाउंड में डॉ. अयूब खान (एमबीबीएस) का परिवार रहता है। डॉ. अयूब की बेटी जोया खान खुद को आईएफएस बताकर एक्सयूवी गाड़ी में नीली बत्ती लगाकर चलती थी।
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