ब्यूरो कानपुर रवि गुप्ता
भारतीय बालरोग अकादमी कानपुर द्वारा एण्टीबायोटिक पर
आयोजित कार्यशाला में शहर के लगभग 50 बाल रोग चिकित्सकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन सचिव डा0 आशीष विश्वास अध्यक्ष डा0 ओपी पाठक ने किया
तथा मुख्य वक्ता डा0 संजय गोरपाडे, डा0 ऊपेन्द्र किन्जे वाडेकर, डा0
सुरेन्द्र नाथ ने व्याख्यान दिया। डा0 संजय ने बताया बच्चों में समानता
होने वाली बीमारिया संक्रमण से होती है जिसमें 70 प्रतिशत वैक्टीरिया
संक्रमण व 10 प्रतिशत बीमारियां प्रोटोजोअल संक्रमण से होती है। जीवाणु
जनित बीमारी का इलाज एण्टीबायोटिक द्वारा किया जाता है जो जीवाणु को मारता
है या उसकी जनसंख्या बढने से रोकता है। डा0 उपेन्द्र ने कहा प्रतिसूक्ष्म
जीव औषधियां, परजीव प्रतिरक्षा की सक्रियता के कारण अपनी प्रभावशीलता खो
रही है। प्राकृतिक उत्पाद, फार्मस्युटिकल क्षेत्र में नई रसायन पद्धति का
एक अच्छा स्रोत है। डा0 सुरेन्द्र ने बताया बीमारी का निश्चित पता करने
लिए माइक्रोबायोलाॅजी सम्बन्धित जांचो का अधिक उपयोग किया जाये। कहा दवा
विक्रेताओं द्वारा एण्टीबायोटिक दवाओं का बिना चिकित्सक के परेचे का विक्रय
बंद हो। अस्पतालों और समुदायों के लिए गुणवत्तापरक आवश्यक दवाइयों की
अबाधित आपूर्ति हो, जन जागरण के लिए शौक्षिक तथा अन्य जागरूकता अभियान
चलाया जाये। इस दौरान डा0 विवेक सक्सेना, डा0 यशवन्त राव ने चिकित्सकों के
प्रश्नों के उत्तर दिये। कार्यक्रम में उा0 एममए मैथारी, डा0 जेके गुप्ता,
डा0 आरसी गुप्ता, डा0 अनुराग भारती आदि मौजूद रहे।
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