रिपोर्ट - पुनीत मिश्रा
फर्रुखाबाद
जिले के सबसे बड़े अस्पताल राममनोहर लोहिया अस्पताल में एनआरसी बार्ड में
दस बैड कुपोषित बच्चों के लिए आरक्षित है लेकिन जिले में कुपोषित बच्चों
की भरमार है।एक बैड पर तीन बच्चों को लिटाया जाता है साथ बहुत से बच्चे वापस कर दिए जाते है जिसका मुख्य कारण अस्पताल में कोई दूसरी व्यवस्था नही
है।उसके साथ ही पहले से यह वार्ड भरा हुआ चल रहा है एक दिन में कुपोषित
बच्चों की संख्या 41 तक हो जाती है।जिसके चलते एक माह पहले अस्पताल में
भर्ती रहे बच्चे को दोबारा नही भर्ती किया जा सका और रिफर करते समय उसकी
मौत हो जाती है ।इस बात को लेकर जब मुख्य चिकिस्या अधिकारी डॉ चंद्रशेखर
से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कुपोषित बच्चों की संख्या बहुत है।एक
वार्ड आरक्षित उसके अलावा यदि अधिक बच्चे आते है उनके लिए हमारे पास
पर्याप्त इंतजाम है।साथ ही कुपोषित बच्चों के परिजनों को जांगरुक होना भी
अति आवश्यक है।लोगो के अंदर अज्ञानता के साथ गरीबी भी है।एनआरसी के डॉक्टर
विवेक सक्सेना से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि क्षमता से अधिक बच्चो
का इलाज कर रहे है।साथ ऊपर 10 वेडो पर 21 बच्चे शिफ्ट किये है वही चार
बच्चों को नीचे वार्ड में भर्ती किया गया है।शासन से मांग की है कि कुपोषित
बच्चों की संख्या को देखते हुए बैड बढ़ा दिए जाएं लेकिन
हकीकत कुछ और ही है क्योंकि डॉक्टर अपना प्राइवेट अस्पताल चला रहे है उसी
बजह से लोहिया अस्पताल में समय नही दे रहे है साथ बच्चो का इलाज भी सही नही
हो पाता है।
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