GORAKHPUR में लेखपाल मतलब प्रापर्टी डीलर एजेंट - Tahkikat News

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Sunday, 12 July 2020

GORAKHPUR में लेखपाल मतलब प्रापर्टी डीलर एजेंट



कृपा शंकर चौधरी

गोरखपुर में लेखपाल मतलब प्रापर्टी डीलर एजेंट

गोरखपुर। संविधान के तहत किसान और आम भुमिधर लोगों के हितार्थ एक पद लेखपाल का श्रृजन किया गया ताकि किसानों के खेतों के संवंधित समस्याओं को त्वरित ढंग से निबटाया जा सके। किन्तु वर्तमान समय में यह पद समस्या निवारण का न होकर धन उगाही और भ्रष्टाचार का हो गया है। इस समय इस पद पर पदासीन व्यक्ति अबैध तरीक़े से जहां एक तरफ कास्तकारों को परेशान कर रहे हैं वही दूसरी तरफ सरकार एवं राजस्व विभाग का पलीता लगा रहे है।
मामला गोरखपुर के अलग अलग विकाश खंड का है जहां कास्तकारों द्वारा बताया गया कि पहले चकबंदी के दौरान गाटो मे फेरबदल का काम किया गया जिससे तमाम कास्तकार अनभिज्ञ रहे अब जानकारी होने पर पैमाइश के नाम पर दौडाया जाता है या सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। तफ्तीश से इतना तक जानकारी निकल कर आ रही है कि अधिकाशतः पैमाइश बिना सुबिधा शुल्क के नही हुई हैं।
खजनी विकाश खंड के भिवरी ग्राम सभा के महेन्द्र चौधरी ने बताया कि लेखपाल और प्रधान के मीलीभगत से उनके पट्टे की जमीन को दूसरे व्यक्ति से कब्जा करा दिया गया जिससे अब वह इधरउधर चक्कर लगाने पर मजबूर हैं। इस संवंध मे शिकायत करने पर लेखपाल द्वारा अन्य जगह जमीन देने की बात की जा रही है। इस तरह के भ्रष्टाचार के शिकार केवल महेंद्र नहीं है बल्कि जांच की जाए तो बहुत से नाम निकल कर आएंगे। आलम यह हो गया है कि सुविधा के लिए जिस लेखपाल पद का श्रृजन किया गया अब वह सरकारी जमीन को अपनी बपौती मान बैठा हैं और मनमाफिक ढंग से बंदरबांट करते हुए फरियादियों कि शोषण कर रहा है।
इसी प्रकार खोराबार विकाश खंड के किसानों द्वारा बताया गया कि पैमाइश के लिए सुबिधा शुल्क जरूरी है अन्यथा परेशान होना पडेगा। इस क्षेत्र में प्रापर्टी डीलरों की अच्छी घुसपैठ होने से लेखपालों की भी चाँदी ही चाँदी है। शुत्रो की माने तो इन प्रापर्टी डीलरों की जमीन पैमाइश के रेट 20000 से 50000 फिक्स है। जैसी जमीन वैसा रेट। सुनने में अचम्भा लगेगा कि इतना मोलभाव क्यो तो दरअसल इन डीलरों के द्वारा ली गई जमीन के अगल बगल ग्राम पंचायत की जमीन के बंदर बाट का यह राज है। डीलरों के एक फोन पर लेखपाल एक पैर पर खडे नजर आते है किंतु वहीं दूसरी तरफ अपने जमीन की पैमाईश के लिए किसान के चप्पलें घिस जाती है।
मुख्यमंत्री के गृहजनपद मे डीलरों के एजेंट बने लेखपालों की जाच होनी चाहिए ताकि सरकार पर किसानों का भरोसा बना रहे।

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