माइकल भारद्वाज बलियाा
सदन उनकी भी नहीं है जो इसे चलाने का दवा करते हैं- सुशांत राज भारत
बलिया- संसद ने कहा है तो सच ही होगा..... राम की कसम राजा बोला कि रात है तो मंत्री भी बोला कि रात है, ये सुबह सुबह की बात है। यह पंक्तियां सरकार के द्वारा सदन में दिए गए बयान पर चरितार्थ होती दिख रही है। जिसमें सरकार ने कहा है कि ऑक्सीजन की कमी से कोई नहीं मारा है कोरोना काल में। इस बयान से भी अजीब बात ये लगी कि जनता के द्वारा चुने हुए भारतीय जनता पार्टी के सांसद रूपी प्रतिनिधियों ने गूंगी साध रखी है जबकि सच्चाई यह है कि उसी संसद में बैठने वाले कितने सांसद ऑक्सीजन की कमी से ही चल बसे। इस बात से यह स्पष्ट होता है कि यह सदन उनकी भी नहीं है जो इसे चलाने का दावा करते हैं। सरकार से तब मैं सुशांत राज भारत ( संस्थापक आवाज ए हिंद ) कहना चाहूंगा कि एक भी ऑक्सीजन प्लांट देश में ना लगाएं क्योंकि आने वाले संभावित कोरोना की तीसरी लहर से भी अक्सीजन की कोई कमी नहीं होने वाली है और ना ही किसी के मरने की आशंका है सरकार के मुताबिक। तो फिर यह जनता के टैक्स का पैसा बिना जरूरत के ऑक्सीजन प्लांट लगाने में बर्बाद ना करें जो लोग मरे या जिनकी ला से गंगा में तैरती मिली इन सभी लोगों पर मुकदमा किया जाए आत्महत्या करने के आरोप में तथा सरकार की इस कथन पर थोड़ा मत चौंकीए, पूरा चौंकीए। यह जानकार की किसी भी राज्य की, किसी भी दल की, सरकार ने ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत हुई है ऐसा मानने को तैयार नहीं है। मतलब साफ है सभी दलों की, सभी सरकारे, सभी नेता असंवेदनशील हैं। कुर्सी के भूखे हैं, निर्लज्ज है क्योंकि कोई भी व्यक्ति बिना अक्सीजन के नहीं मारा ।
आगे सरकार पर तंज कसते हुए सुशांत राज भारत ने कहा कि इस बयान पर तो समुंदर को उबालना चाहिए, सदन से लेकर सड़क तक गर्म हो जानी चाहिए। जिसकी आच का एहसास आने वाली हर सरकार को हो। पर अफसोस ऐसा नहीं हो रहा है क्योंकि राजा ने कहा है कि अभी रात है भले यह सुबह सुबह की बात है। ऐसी सदन को मैं सुशांत राज भारत दोनों हाथ पूरब की ओर करके ,पीपल के पेड़ के नीचे खड़े होकर, बारंबार प्रणाम करता हूं। सरकार के सभी मंत्री सांसद जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में क्या हो रहा है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि यह सभी लोग निर्लज्ज हो गए हैं। इनके आंखों की शर्म मर गई है।
मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि अब कभी दोबारा भगवा की सरकार ना दिखे। आखरी में एक बात और जरूर कहना चाहूंगा किस में जनता जनार्दन का भी दोष है। देश में अब जिला पंचायत और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव का कोई मतलब नहीं है ।जब पैसे रुपए से ही चुनाव जीतना है तो क्या जरूरत है इस प्रकार से चुनाव कराने की। यह चुनाव सीधे जनता से कराई जाए।
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