कानपुर जिला संवाददाता -रवि तहकीकात न्यूज़
देश भर में बप्पा मोरया की जय जय कार शुरू हो चुकी है जिधर भी देखो बस
बप्पा मोरया देवा श्री गणेशा के भव्य पंडालों व मंदिरों में गणेश जी पूजा
अर्चना और आरतियां के साथ ही धार्मिक आयोजन दिन रात किये जा रहे है हर भक्त
बप्पा की भक्तिमय में डूबा हुआ है। हम सभी ने मुम्बई के प्रसिद्ध
सिद्धिविनायक मंदिर के बारे में तो सुन ही रखा है वहीं आज आपको एक ऐसे
मन्दिर के बारे में बताने जा रहे हो जो कि मुम्बई के बाद दूसरा
सिद्धिविनायक मंदिर घण्टाघर स्थित सुतरखाना में है। इस मन्दिर की बनावट एक
मकान रूपी दिखाई देती है यहां गणेश जी की 8 अवतार वाली मूर्ति स्थापित है
जो केवल मुम्बई में ही है और कानपुर में इस मंदिर के बाहर गणेश जी की लगभग
60 फीट की प्रतिमा बनी हुई है।
यह मंदिर 97 वर्ष पुराना है।
मन्दिर
के दूसरे खण्ड में स्थापित गणेश जी के इन आठ अवतारों वाली मूर्ति में एक
तरफ ब्रह्मा, विष्णु,रुद्र और इंद्र है जबकि दूसरी तरफ अग्नि,वायु ,सूर्य
और चंद्रमा है। इस मन्दिर में वैसे तो हर दिन भक्तों की भीड़ रहती है लेकिन
बुधवार को गणेश महोत्सव अच्छी खासी भक्तों की भीड़ दर्शन के लिए पहुंचती है।
बालगंगाधर तिलक ने मंदिर की रखी नींव
आयोजन
समिति के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता (ननकू) ने बताया कि 1921 में बाल गंगाधर
तिलक ने इस मन्दिर की नींव रख कर स्थापना कि थी उस वक्त ब्रिटिश हुकूमत का
आतंक था बालगंगाधर तिलक ने यहां क्रांतिकारियों के साथ मन्दिर के निर्माण
को लेकर अक्सर मीटिंग किया करते थे। क्योंकि वह मराठी थे इसलिये वे चाहते
थे कि यहां सिद्धिविनायक मन्दिर का निर्माण हो ब्रिटिश हुकूमत ने इसका
विरोध भी किया था क्योंकि पास में ही 50 मीटर की दूरी पर मस्जिद भी थी बाल
गंगाधर ने ब्रिटिश हुकूमत से मन्दिर के निर्माण को लेकर बात की जिसकी
मंजूरी तो ब्रिटिश ने दे दी लेकिन कहा कि इसे मंदिर की तरह नही एक मकान का
रूप दो जिसके बाद इसे मकान की तरह बनवाया गया और पहले खण्ड पर गणेश जी
मूर्ति स्थापित की गई तबसे यहां 97 वर्ष हो चुके है यहां गणेश महोत्सव के
दिन हज़ारो की तादाद में भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
मन्दिर की यह विशेषता
इस
मंदिर की विशेषता यह है कि पहले खण्ड में भगवान गणेश जी की मूर्ति उसी
मूर्ति में रिद्धि सिद्धि भी विराजमान है और दाहिनी तरफ उनकी सूंड है।
दिनेश गुप्ता ने बताया की वहीँ मुम्बई में भी अष्टनायक है जो अलग है यहां
जैसे जैसे भक्तों की भीड़ बढ़ती गयी वैसे वैसे मन्दिर भी बढ़ता गया। और यहां
भक्तों के दर्शन के लिए सिद्धिविनायक आठ अवतार वाले गनेश जी की मूर्ति
स्थापित की गई यहां विराट स्वरूप वाले गणेशजी की मूर्ति मुंबई के बाद केवल
कानपुर में ही है। इस मंदिर में तीनों खंडों में भव्य आरती होती है। और
भक्तों को प्रसाद दिया जाता है मन्दिर परिसर के एंट्री करते ही भक्त अपने
जूते चप्पल लगे बैरक में ऊतारकर ऊपर दर्शन के लिए जाते हैं
ऐसी है मान्यता
मान्यता
तो ऐसी है कि वह तो विघ्नहर्ता है दाहिने सूंड वाले गणेश जी के दर्शन पाकर
भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती है उन्होंने मंदिर की खास बात बताते हुए कहा
कि बुजुर्गों का कहना है मन्दिर का निर्माण चल रहा था और उसकी स्लैब नहीं
पड़ रही थी सभी परेशान थे जिसके बाद पुजारी ने कहा कि कल हम भक्तों के पास
चलेंगे सरिया के लिये लेकिन ऐसा चमत्कार हुआ कि रातोरात एक ट्रक आया और
सरिया उतार कर चला गया न ही पता चला कि वह ट्रक किसका था और सुबह देखा तो
मन्दिर में स्लैब पड़ गयी। यहां जैसे भक्त सुनते है कि कानपुर में भी
सिद्धिविनायक है वहीं मुम्बई से भी भक्त यहाँ आते है और कई जनपदों से
भक्तों का आना जाना लगा रहता है।
दर्शन करने आए आकाश
यादव ने बताया कि बचपन से यहां आ रहे हैं हमारी बप्पा ने सभी मनोकामना पुरी
की है सारे विघ्न हर लेते है हमारे बप्पा यहां बप्पा से अर्जी लगाने पर
कुंवारी लड़कियो की शादी जल्द हो जाती है और यहां पर माताएं, बहने एक चिट्ठी
में लिखकर सिध्दिविनायक के पास रखकर अपनी अर्जी लगाती है जिनकी मनोकामनाएं
जरूर पूरी होती है।


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