गोरखपुर- कृपा शंकर चौधरी तहकीकात न्यूज़
चिराग तले अंधेरा कहावत को चरितार्थ करता
गोरखपुर का रामनगर कड़जहां गांव है । इस गांव को गोरखपुर जिलाधिकारी द्वारा
गोंद लिया गया है किन्तु तीन - तीन जिलाधिकारी देख चुका गांव अब भी विकास
की राह जोह रहा है । ग्राम सभा के द्वारा तीन मांग रखी गई किन्तु सिवाय
सांत्वना के और कुछ नहीं मिला ।
दरअसल रामनगर
कड़जहां गांव गोरखपुर जिलाधिकारी के द्वारा गोंद लिया गांव है । गोंद लेते
समय गांव में विकास की बात कही गई थी किन्तु वास्तव में जमीन पर विकास नहीं
दिखाई दे रहा है ।
ग्राम प्रधान शिवकुमार ने बताया कि गत माह नए
जिलाधिकारी विजयेन्द्र पांडियन द्वारा गांव का दौरा किया गया और हर बार की
तरह इनके सामने भी हमने तीन मांग रखी है जिसपर अभी तक कोई पहल नहीं हुई है
। प्रधान ने बताया कि गत दो वर्षों में यहां इंसेफलाइटिस से दो मौत हो
चुकी है और जिलाधिकारी द्वारा छोटे नलों के पानी से परहेज़ को भी कहा गया
है इसे देखते हुए हमने पानी की टंकी का प्रस्ताव उनके सामने रखा है । इसके
लिए ग्राम सभा के पास जमीन है ।
उन्होंने बताया कि पानी की टंकी लगने से
लगभग पांच हजार लोगों को फायदा होगा और इंसेफलाइटिस जैसी बिमारी से भी बचाव
होगा ।
दूसरी मांग के संबंध में उन्होंने कहा कि
ग्रामसभा में स्थित इंटर एवं प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचने के लिए प्रयोग
में लाई जाने वाली सड़क जर्जर हो चुकी है जिससे हजारों की संख्या में
विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं । इस सड़क के संबंध में भी महोदय को अवगत
कराया कराया जाता रहा है । तीसरा मांग फोरलेन अंडरपास की सड़क सही करने की
है जिसपर आएदिन लोग गिरकर चोटिल होते रहते हैं
बताते
चलें कि लगभग पांच हजार आबादी वाले इस ग्रामसभा में तहकीकात न्यूज़ के
पत्रकार ने जब पड़ताल किया तो प्रधान के द्वारा बताई गई बातें सही थी एवं
मांगें पूरी तरह जायज़ है । गांव में 570 के सापेक्ष लगभग 300 शौचालय
निर्माण हुआ है जबकि 77 सामान्य वर्ग के आवास के दावेदार है किन्तु अभी तक
किसी को आवास मुहैया नहीं हो पाया है । बी पी एल वर्ग के 19 लोगों को आवास
की प्राप्ती हुई है । इसके अलावा इंडिया मार्का हैंडपंप की भी कमी देखी गई
जो है उसमें तमाम ख़राब पाया गया । स्वछता की गवाही प्राथमिक विद्यालय के
प्रांगण में बढ़े धास एवं कूड़े दे रहे हैं ।
गौरतलब
बात यह है कि जब जिलाधिकारी के द्वारा गोंद लिए गांव का यह हाल है तो आम
गांवों का क्या होगा एवं जायज़ मांग को दरकिनार कर उपेक्षा की दृष्टि रखना
गांव का लावारिस होना प्रतीत करता है ।

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