रिपोर्ट:-- पुनीत मिश्रा
रामलीला का रावण नफरत का शिकार रहा पर परंपराएं क्या ना करा दे एक बार फिर
लोग दशहरा के रावण मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले जलाए जाने के बाद पुतलो की
लकड़ी लेने के लिए टूट पड़े किसी हादसे की संभावना के चलते पुलिस ने इन
लोगों को पुत्रों के जले अवशेषों के पास जाने से रोका पर टोटके के दीवाने
लोग फिर भी नहीं माने मान्यता है
कि पुतलो की लकड़ी के रहने पर लोग किसी
प्रकार की भूत प्रेत की बाधा से बचे रहते हैं दशहरा को पुतला दहन के बाद हर
साल यह परंपरा दोहराई जाती है।रामलीला का रावण मेघनाथ और
कुंभकरण सदैव से ही लोगों की नफरत का केंद्र रहे हैं पुतले जलाने के लिए हर
साल आयोजन होते हैं लेकिन एक ऐसी परंपरा भी है जिसके चलते लोगों को पुतलो
के जल जाने के बाद उनके अवशेषों का एक छोटा हिस्सा भी मिल जाए तो लोग मेहनत
सफल मानते हैं
यह टोटके कितने सही हैं और कितने गलत यह तो इन्हें आजमाने
वाले लोग ही जाने पर कुछ लोग कहते हैं कि पुतलोनकी लकड़ी का हिस्सा रहने पर
भी किसी भी प्रकार की भूत प्रेत बाधा से बचे रहते हैं कुछ लोगों का कहना
है कि पुत्रों की लकड़ी को पलंग में बांध लेने पर खटमल जैसे कीड़े नहीं आते
फिलहाल जैसे ही पुतला दहन पूरा हुआ लोग लकड़ी का हिस्सा लेने के लिए दौड़
पड़े पुलिस की रोकटोक भी उन्हें नहीं रोक पाई।
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