रिपोर्ट -अरविन्द शर्मा
उत्तर प्रदेश सरकार बिना मान्यता वाले स्कूलों पर नकेल कसने के लिए क्यों ना बड़े-बड़े बड़े कानून बना रही हो लेकिन प्रदेश सरकार की सारी कवायद इन स्कूल मालिकों की दबंगई के सामने दम तोड़ती नजर आरही हैं, और स्कूल मालिक अपनी दबंगई के चलते शिक्षा विभाग के नियम और कायदों की धज्जियां उड़ाते दिख रहे हैं ऐसा ही मामला जनपद कानपुर देहात में देखने को मिला जहां स्कूल के प्रबंधक ने मर्यादा की सारी हदें पार कर दी और जर्जर भवन में देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों के साथ शिक्षा का खिलवाड़ करने में लगा हुआ है
वहीं स्कूलप्रबंधक ने क्या सीएम , क्या सचिव क्या डीएम और क्या जिला विद्यालय निरीक्षक सबको दरकिनार कर धड़ल्ले से बिना मानक शिक्षा विभाग की धज्जियां उड़ा कर स्कूल संचालित करने में लगा है स्कूल का भवन इतना जर्जर है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है लेकिन जिले के आला अधिकारी मामला संज्ञान में ना होने की बात कहकर पल्ला झाड़ते नजर आए
पूरे मामले को देख कर आप अंदाजा लगाया जा सकता है कि कानपुर देहात का जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते इस स्कूल को संरक्षण देने का काम करने मे लगा है ओर एक बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है जिसके कारण सरकार के नियम और मानकों की खुल करधज्जियां उड़ाई जा रही हैं |
उत्तर प्रदेश सरकार बिना मान्यता वाले स्कूलों पर नकेल कसने के लिए क्यों ना बड़े-बड़े बड़े कानून बना रही हो लेकिन प्रदेश सरकार की सारी कवायद इन स्कूल मालिकों की दबंगई के सामने दम तोड़ती नजर आरही हैं, और स्कूल मालिक अपनी दबंगई के चलते शिक्षा विभाग के नियम और कायदों की धज्जियां उड़ाते दिख रहे हैं ऐसा ही मामला जनपद कानपुर देहात में देखने को मिला जहां स्कूल के प्रबंधक ने मर्यादा की सारी हदें पार कर दी और जर्जर भवन में देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों के साथ शिक्षा का खिलवाड़ करने में लगा हुआ है
वहीं स्कूलप्रबंधक ने क्या सीएम , क्या सचिव क्या डीएम और क्या जिला विद्यालय निरीक्षक सबको दरकिनार कर धड़ल्ले से बिना मानक शिक्षा विभाग की धज्जियां उड़ा कर स्कूल संचालित करने में लगा है स्कूल का भवन इतना जर्जर है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है लेकिन जिले के आला अधिकारी मामला संज्ञान में ना होने की बात कहकर पल्ला झाड़ते नजर आए
पूरा मामला कानपुर देहात की तहसील मैथा क्षेत्र के गांव जसा पुरवा का
है इस गांव में स्थित मॉडल हाई सेकेंडरी स्कूल जो बिना मान्यता के ग्राम
समाज की भूमि पर अवैध तरीके से संचालित है अगर विद्यालय भवन की बात की जाए
तो भवन इतना जर्जर है की कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है विद्यालय परिसर
के अंदर जब जाकर देखा गया तो ना ही विद्यालय में साफ सफाई थी और ना ही
विद्यालय में छात्र छात्राओं के बैठने की सही व्यवस्थाएं वहीं विद्यालय में
पढ़ने वाले छात्रों के पानी पीने की बात की जाए तो छात्र-छात्राएं वारिस
का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं बरहाल पूरे मामले को देख कर साफ़ अंदाजा
लगाया जा सकता है
कि प्रदेश सरकार की नीत मानक और नियमों की किस कदर
धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और इस स्कूल पर जिले के किसी अधिकारी की नजरे भी
इनायत नहीं हुई जिले के अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह विद्यालय बिना
मान्यता के अवैध तरीके से संचालित हो रहा है और जिले का कोई अधिकारी इस पर
कार्यवाही करने को तैयार नहीं क्या जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार
में बैठा है जब पूरे मामले को लेकर जिले के जिला विद्यालय निरीक्षक से बात
की तो कहा कि इस तरह का विद्यालय को हमारे द्वारा किसी प्रकार की मान्यता
नहीं दी गई है और इस तरीके के विद्यालय के बारे में कोई जानकारी नहीं है
बता कर अपना पल्ला झाड़ते नजर आए ।
वहीं
जब स्कूल के छात्रों से बात की तो छात्रों ने स्कूल में अव्यवस्थाओं के
बारे में बताते हुए कहा कि इस स्कूल में पढ़ने से हम लोगों की जान का खतरा
हमेशा बना रहता है और हम लोग गरीब होने के कारण जंगल में बने इस स्कूल में
पढ़ रहे हैं ।
जब पूरे मामले को लेकर स्कूल के प्रबंधक व प्रधानाचार्य अनिल कुमार
राजपूत से बात की प्रबंधक महोदय आपे से बाहर हो गए और मीडिया के लोगों पर
बरसना शुरू कर दिया वहीं प्रबंधक महोदय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
योगी से लेकर जिले के अधिकारियों तक को खुलीचुनौती
दे डाली और कहा की सारे लोग भ्रष्ट हैं और हम स्कूल को केवल भवन के रखरखाव
के लिए संचालित कर रहे हैं यहां तक ही नही प्रबंधक महोदय ने अपने फर्जी
स्कूल को वैध बताते हुए कहा की कि हम सरकार के शासनादेश और नियम मानक को नहीं मानते क्योंकि ये शासन आदेश और मानक मेरे अनुरूप नहीं है।
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