रिपोर्ट:-- पुनीत मिश्रा
अयोध्या और प्रयागराज के अस्तित्व में आने के बाद 27 दिसंबर 1713 को
अस्तित्व में आए 305 साल पुराने फर्रुखाबाद जनपद का नाम बदलने की मांग शुरू
हो गई है महाभारत कालीन कई प्रतीक मिलने के कारण भाजपा और हिंदूवादी
संगठनों के पदाधिकारी फर्रुखाबाद का नाम पांचाल नगर या भीष्मनगर करने की मांग
कर रहे हैं
फर्रुखाबाद का नाम बदलने की मांग के पीछे केवल यही है कि
मुस्लिम आक्रांताओं के नाम अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे भाजपा विधायक सुशील
शाक्य ने फर्रुखाबाद का नाम पांचाल नगर करने की मांग की है वहीं सपा और
कांग्रेस ऐतिहासिक जनपद का नाम बदलने की मांग को निरर्थक और अपनी नाकामियों
को छिपाने भर बताया जा रहा है
27 दिसंबर 1713 को मुगल शासक मोहम्मद खान बंगश ने दिल्ली के सम्राट फर्रूखसियर के नाम पर फर्रुखाबाद का नामकरण किया था बंगाल का मकबरा पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है यहां हर साल फर्रुखाबाद की स्थापना दिवस पर बंगाल के वंशजों द्वारा कुरान ख्वानी आज के कार्यक्रम किए जाते हैं पिछले 21 सालों से फर्रुखाबाद महोत्सव भी आयोजित किया जाता है लेकिन जब जिलों के नाम बदलने की बयार चली तो फर्रुखाबाद का नाम बदलने की भी मांग जोर पकड़ रही है इसके पीछे भाजपा और हिंदूवादी संगठनों के नेता हैं जिन्हें मुस्लिम आक्रांताओं के नाम पर बसा शहर अच्छा नहीं लगता अमृतपुर क्षेत्र के विधायक सुशील साथ भाजपा के कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र के अध्यक्ष सत्यपाल सिंह ने आगे आकर फर्रुखाबाद का नाम बदलने की मांग को ध्वनि दी है
27 दिसंबर 1713 को मुगल शासक मोहम्मद खान बंगश ने दिल्ली के सम्राट फर्रूखसियर के नाम पर फर्रुखाबाद का नामकरण किया था बंगाल का मकबरा पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है यहां हर साल फर्रुखाबाद की स्थापना दिवस पर बंगाल के वंशजों द्वारा कुरान ख्वानी आज के कार्यक्रम किए जाते हैं पिछले 21 सालों से फर्रुखाबाद महोत्सव भी आयोजित किया जाता है लेकिन जब जिलों के नाम बदलने की बयार चली तो फर्रुखाबाद का नाम बदलने की भी मांग जोर पकड़ रही है इसके पीछे भाजपा और हिंदूवादी संगठनों के नेता हैं जिन्हें मुस्लिम आक्रांताओं के नाम पर बसा शहर अच्छा नहीं लगता अमृतपुर क्षेत्र के विधायक सुशील साथ भाजपा के कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र के अध्यक्ष सत्यपाल सिंह ने आगे आकर फर्रुखाबाद का नाम बदलने की मांग को ध्वनि दी है

No comments:
Post a Comment
तहकीकात डिजिटल मीडिया को भारत के ग्रामीण एवं अन्य पिछड़े क्षेत्रों में समाज के अंतिम पंक्ति में जीवन यापन कर रहे लोगों को एक मंच प्रदान करने के लिए निर्माण किया गया है ,जिसके माध्यम से समाज के शोषित ,वंचित ,गरीब,पिछड़े लोगों के साथ किसान ,व्यापारी ,प्रतिनिधि ,प्रतिभावान व्यक्तियों एवं विदेश में रह रहे लोगों को ग्राम पंचायत की कालम के माध्यम से एक साथ जोड़कर उन्हें एक विश्वसनीय मंच प्रदान किया जायेगा एवं उनकी आवाज को बुलंद किया जायेगा।