वंदे मातरम की अनिवार्यता पर अस्थायी रूप से रोक लगाने वाले मध्यप्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अब इस मामले पर यूटर्न ले लिया है. कमलनाथ ने कहा है कि इस फैसले को अपडेट किया गया है और अब से पुलिस बैंड की धुन पर राष्ट्रगीत गाया जायेगा, जिसमे आम जनता भी भाग ले सकती है. ज्ञात हो कि 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने इस परंपरा की शुरुआत कि थी.
बता दें कि मध्य प्रदेश के सचिवालय में लंबे समय से चला आ रहा एक रिवाज अचानक से बदल दिया गया। यह परंपरा थी महीने के पहले दिन राष्ट्रगीत गाने की। नया साल शुरू हुआ, पहली तारीख पर जब वंदे मातरम नहीं गूंजा तो सवाल खड़े होने लगे। विपक्षी दल बीजेपी ने सरकार पर जमकर निशाना साधा था। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था, 'अगर कांग्रेस को राष्ट्रगीत के शब्द नहीं आते हैं या राष्ट्रगीत के गायन में शर्म आती है तो मुझे बता दें। हर महीने की पहली तारीख को वल्लभ भवन के प्रांगण में जनता के साथ वंदे मातरम मैं गाऊंगा।' कमलनाथ सरकार के फैसले के अनुसार, अब महीने के पहले कार्यदिवस के दिन पुलिस बैंड की धुन पर वंदे मातरम का गान होगा। इसमें आम जनता भी शामिल होगी। इसके लिए शौर्य स्मारक से गांधी स्मारक तक मार्च होगा, जिसमें सचिवालय के कर्मचारी भी शामिल होंगे। बता दें कि पहले सचिवालय में हर महीने के पहले कार्यदिवस पर वंदे मातरम का गान होता था। 2005 से तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने यह परंपरा शुरू की थी।
बता दें कि मध्य प्रदेश के सचिवालय में लंबे समय से चला आ रहा एक रिवाज अचानक से बदल दिया गया। यह परंपरा थी महीने के पहले दिन राष्ट्रगीत गाने की। नया साल शुरू हुआ, पहली तारीख पर जब वंदे मातरम नहीं गूंजा तो सवाल खड़े होने लगे। विपक्षी दल बीजेपी ने सरकार पर जमकर निशाना साधा था। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था, 'अगर कांग्रेस को राष्ट्रगीत के शब्द नहीं आते हैं या राष्ट्रगीत के गायन में शर्म आती है तो मुझे बता दें। हर महीने की पहली तारीख को वल्लभ भवन के प्रांगण में जनता के साथ वंदे मातरम मैं गाऊंगा।' कमलनाथ सरकार के फैसले के अनुसार, अब महीने के पहले कार्यदिवस के दिन पुलिस बैंड की धुन पर वंदे मातरम का गान होगा। इसमें आम जनता भी शामिल होगी। इसके लिए शौर्य स्मारक से गांधी स्मारक तक मार्च होगा, जिसमें सचिवालय के कर्मचारी भी शामिल होंगे। बता दें कि पहले सचिवालय में हर महीने के पहले कार्यदिवस पर वंदे मातरम का गान होता था। 2005 से तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने यह परंपरा शुरू की थी।

No comments:
Post a Comment
तहकीकात डिजिटल मीडिया को भारत के ग्रामीण एवं अन्य पिछड़े क्षेत्रों में समाज के अंतिम पंक्ति में जीवन यापन कर रहे लोगों को एक मंच प्रदान करने के लिए निर्माण किया गया है ,जिसके माध्यम से समाज के शोषित ,वंचित ,गरीब,पिछड़े लोगों के साथ किसान ,व्यापारी ,प्रतिनिधि ,प्रतिभावान व्यक्तियों एवं विदेश में रह रहे लोगों को ग्राम पंचायत की कालम के माध्यम से एक साथ जोड़कर उन्हें एक विश्वसनीय मंच प्रदान किया जायेगा एवं उनकी आवाज को बुलंद किया जायेगा।