रिपोर्ट - महेन्द्र मिश्रा ब्यूरो लखनऊ
तू बंदर मैं रिच इसकी रस्सी खींच सियासत में कुछ पता नही चलता कि कब कौन
किसको खींचकर नीचे डाल दे और क्या हो जाए।सियासत को रेत की दीवार भी कहा
जाता है पानी आ जाने पर सबकुछ पहले जैसा हो जाता है जैसे कुछ हुआ ही न हो
ऐसा लगता है और उस रेत की दीवार का ठेकेदार बस देखता रह जाता है महल कोई
बनाता है रहने कोई और लगता है उसके सामने तो बस एक ही सवाल रह जाता है कि
यह सब क्या हो गया किसी ने सही कहा है कि ज़्यादा मचलना सियासत में नही
चाहिए।बसपा और सपा के बीच गठबंधन हो जाने के बाद यूपी के सियासी हालात कुछ
ओर ही संकेत दे रहे है यह बात अपनी जगह है।कांग्रेस ने यूपी में प्रियंका
गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारकर वेंटिलेटर पर साँसें ले रही पार्टी की
आवाज निकलने लगी है इसका चुनाव में कितना फ़ायदा होगा या नही होगा यह तो
आने वाले चुनाव में पता चलेगा कि क्या परिणाम रहा।कांग्रेस को गठबंधन में
जगह न मिलने की वजह से उसे अकेले चुनाव में जाना पड़ रहा है वैसे कांग्रेस
के सूत्रों से पता चला है कि कांग्रेस की नवनियुक्त महासचिव और पूर्वी यूपी
की प्रभारी प्रियंका गांधी गठबंधन में शामिल होने के लिए एक और कोशिश करने
का मन बना चुकी है उनका मानना है कि फिलहाल संयुक्त विपक्ष के सामने
विचारधारा की लडाई है उससे लड़ने के लिए गठबंधन होना ज़रूरी है इस लिए हमें
एकजुट होकर यह लडाई लड़नी चाहिए ऐसा हमारे सूत्र बता रहे है और अगर ऐसा हो
गया तो यह कहना ग़लत नही होगा कि मोदी की भाजपा ज़ीरो पर पहुँच जाएगी खाता
खुलना भी भारी हो जाएगा वैसे मोदी की भाजपा की हालत अभी भी बहुत अच्छी नही
है यह बात वो भी समझ रहे है।अब हम बात करते है एक ऐसी सीट की जहाँ
कांग्रेस ने मोदी लहर होने के बाद भी बढ़िया चुनाव लड़ा था यह बात अलग है
कि यह चुनाव हिन्दू-मुसलमान पर हो गया था दलित बसपा पर चला गया था और भाजपा
जीत गई थी क्योंकि कांग्रेस के प्रत्याशी इमरान मसूद के एक बयान को मोदी
की भाजपा ने मुद्दा बना लिया था जिसमें वो यह कहते सुनाई दे रहे थे कि मोदी
की बोटी-बोटी कर देंगे यह गुजरात नही सहारनपुर है बस फिर क्या था हिन्दू
समाज इस बयान के बाद भाजपा के पक्ष में लामबंध हो गया था और मोदी की भाजपा
यही नही रूकी थी इमरान मसूद के उस बयान की सीडी तैयार करा कर गुजरात,
राजस्थान मध्य प्रदेश आदि हिंदी भाषी प्रदेशों में जहाँ भी इस्तेमाल कर
सकती थी किया था और हिन्दू वोटों को मोदी की भाजपा के पक्ष में करने का काम
किया था फिर गुजरात विधानसभा के चुनाव में पार्टी को हारती देख मोदी ने
खुद इमरान मसूद के उस तथाकथित बयान का इस्तेमाल कर पार्टी को हारने से
बचाया था और कांग्रेस नेता इमरान के बयान से ही कांग्रेस को हराने में
सफलता प्राप्त की थी एक यह भी वजह है इमरान मसूद के टिकट कटने की दूसरी वजह
कांग्रेस पार्टी ने तय किया है कि जो नेता लगातार दो चुनाव हार गया हो उसे
टिकट नही दिया जाएगा किसी नए नेता को मौक़ा दिया जाएगा।वैसे एक बात और भी
है इमरान मसूद के टिकट कटने की कांग्रेस में साम्प्रदायिक सियासत करने की
इजाज़त नही है और इमरान पर साम्प्रदायिक सियासत करने का ठप्पा लग चुका है
हिन्दू उसके नाम पर मोदी की भाजपा के पक्ष एकजुट हो जाता है जिसकी वजह से
जनपद सहित आदि जगह माहौल ख़राब हो जाता है पूरा मुसलमान उसको वोट दे देता
है लेकिन हिन्दू वोट न मिलने से वह हार जाता है 2012 का विधानसभा चुनाव 80
हज़ार लेकर हारा 2014 का लोकसभा चुनाव चार लाख सात हज़ार लेकर हारा 2017 का
विधानसभा चुनाव 90 हज़ार लेकर हारा तीन चुनाव हारा लगातार कांग्रेस के ही
चिन्ह पर ये हाल है उसके सियासी सफ़र का इस लिए कांग्रेस उससे किनारा करना
चाह रही है ताकि उसकी साम्प्रदायिक छवि से छुटकारा पाया जा सके इस लिए
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव को
लड़ाने पर विचार किया जा रहा है इस बात की पुष्टी खुद वरिष्ठ कांग्रेस नेता
हरीश रावत के बयान से भी होती है रावत कहते है कि पार्टी जहाँ से लड़ाएगी
मैं वही से चुनाव लड़ूँगा फिर वह कहते है कि मुझे पार्टी सहारनपुर ,
मुज़फ़्फ़रनगर या ग़ाज़ियाबाद कही से भी लड़ा सकती है इसी में वह जोड़ देते
है कि अगर मेरी पसंद पूछी जाएगी तो मैं सहारनपुर को प्राथमिकता दूँगा इससे
यही स्पष्ट होता है कि पार्टी ने सब कुछ तय कर लिया है कि सहारनपुर में
क्या करना है किसे गुड्डा बनाना है और किसे चुनाव लड़ाना है।कोई भी पार्टी
का वरिष्ठ नेता यह बात नही कहता कि पार्टी मुझे यहाँ से चुनाव लड़ा सकती है
जब अंदर कुछ हो जाता तभी ऐसा कहा जा सकता है।तभी को कहते है यह सियासत है
इसमें कब क्या हो जाए कुछ नही कहा जा सकता है सियासत में बड़ा सँभलकर रहना
चाहिए।

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