रिपोर्ट - पुनीत मिश्रा
पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने फर्रुखाबाद में पतंगबाजी के जरिए अपनी
नई इनिंग का आगाज किया है चुनाव लड़ने को तैयार सलमान खुर्शीद का यह
पतंगबाजी एपिसोड कांग्रेस के पुरानो को जोड़ना और नए में उत्साह व ऊर्जा
समाहित करने में कामयाब रहा फिलहाल सलमान खुर्शीद कहते हैं कि पेच कोई और
काटता है कटी पतंग का अनुभव हमें है और पतंग कटने के बाद हमारी अगली पतंग
क्या करती है इसके लिए दूसरों को तैयार रहना चाहिए
दरअसल चुनाव
भी तो पतंगबाजी जैसे ही है उम्मीदवार यानी पतंग आसमान में आकर डरती है और
पेच होता है और पतंग कटने के बाद पतंगबाज फिर नई पतंग लेकर अगले पेच के लिए
तैयार हो जाता है राजनीति में अपने पिता की विरासत को संभालने वाले सलमान
खुर्शीद फर्रुखाबाद से दो बार सांसद चुने गए यहां के रहने वालों को इसके
लिए गर्व है कि सलमान खुर्शीद को कानून और विदेश मंत्री बनाने वाला
फर्रुखाबाद ही है सलमान खुर्शीद को सियासत के फलक पर बैठने वाले फर्रुखाबाद
वासियों को अफसोस रहा तो केवल इस बात का कि सलमान की व्यस्तता उनके रिश्तो
में बाधा बनती रही पर कई चुनाव हारने के बाद भी फर्रुखाबाद ना छोड़ने की
उनकी जिद के लोग कायल भी है पिछले 5 सालों में यहां के लोगों को फर्रुखाबाद
में सलमान खुर्शीद का दीदार केवल तीन बार हो पाया है फिलहाल में पतंग
उड़ाकर राजनीति की नई पारी शुरुआत करने आए हैं सलमान खुर्शीद कहते कोई और
काटता है और कटी पतंग का अनुभव हमें है पर हमारी अगली पतंग क्या करती है यह
देखने के लिए तैयार रहना चाहिए सलमान खुर्शीद ने कहा कि उन्होंने हिंदू और
मुसलमानों के त्योहारों को कभी अलग अलग करके नहीं देखा पतंग उत्सव में
उपस्थित मुस्लिम चेहरे इस बात के गवाह है कि पहले भी हम मिलकर सभी हिंदू
मुस्लिम त्यौहार मनाते रहे है
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