पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा किसानों के लिए घड़ियाली आंसू बहाने वाली भाजपा के झूठ.. - Tahkikat News

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Sunday, 24 March 2019

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा किसानों के लिए घड़ियाली आंसू बहाने वाली भाजपा के झूठ..

महेन्द्र मिश्रा  ब्यूरो

 समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि किसानों के लिए घड़ियाली आंसू बहाने वाली भाजपा के झूठ, फरेब की पोल रोज-ब-रोज खुलती जा रही है। गन्ना किसान परेशान हैं और मिल मालिक मौज कर रहे हैं। किसान भुगतान के लिए ही नहीं, बल्कि मिल तक गन्ना पहुंचाने के लिए पर्चियों की खातिर भी तरस गए हैं, जबकि माफिया उन्हीं पर्चियों के सहारे लूट मचा रहे हैं। सरकारी दावों के विपरीत अभी भी गन्ना किसानों का 10,074.98 करोड़ रूपया बकाया चल रहा है। प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी मिलकर किसानों को धोखा देने की साजिश में संलिप्त हैं।


 भाजपा का दावा तो यह था कि उनकी सरकार बनने के 14 दिनों में गन्ना किसानों का बकाया भुगतान हो जाएगा। गन्ना एक्ट में तो यह भी है कि 14 दिन में भुगतान न होने पर चीनी मिल को 14 से 16 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा लेकिन जो हाल है उसमें तो इसे किसानों के साथ एक मजाक ही समझा जाना चाहिए। विडम्बना है कि किसानों की तो सरकार ने सुध नहीं ली लेकिन मिल मालिकों को कई-कई रियायती पैकेज बांटे गए हैं। यही नहीं, जनसामान्य पर षुगर सेस लगाने और गन्ना किसान फंड बनाने की घोषणाएं मिल मालिकों को संरक्षण देने के लिए ही की गई है।  प्रधानमंत्री जी अपनी सभाओं में यह बात दुहराते थे कि संकल्प पत्र के वादे के मुताबिक किसानों की आय दोगुनी होगी, गन्ना किसानों का बकाया सीधे उनके बैंक खातों में भेजेंगे, मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मिल मालिकों ने भुगतान में देरी की तो उन पर डंडा चलेगा। लेकिन ये डंडा तो कभी चला नहीं। उल्टे मुख्यमंत्रीजी कहने लगे हैं कि किसान गन्ना बोता ही क्यों है? किसान के ज्यादा गन्ना बोने से लोगों को शूगर की बीमारी हो रही है।  किसान की बदहाली में भाजपा सरकार की नीतियां ही दोशी हैं। खेती की बढ़ती लागत, खाद, पानी, बिजली, कीटनाशक आदि की कीमतों में बढ़ोत्तरी, न्यूनतम समर्थन मूल्य का न मिलना और बकाया भुगतान में देरी से किसान कर्ज में डूबता जाता है और जब कहीं से कोई राहत नहीं मिलती दिखाई देती है तो वह आत्महत्या करने को विवश हो जाता है। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से ही भाजपा सरकार के  पांच वषों में 55 हजार किसान आत्महत्याएं कर चुके हैं।  बात दिन के उजाले की तरह साफ है कि भाजपा और इसके नेताओं को किसानों की कतई परवाह नहीं हैं। वे सिर्फ वोट बटोरने के लिए किसान हित की बात करते है और अपना स्वार्थ सधते ही किसानों के साथ धोखाधड़ी करने लग जाते हैं। वे इस मामले में काफी महारत भी रखते हैं। समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन भाजपा की इन्हीं जनविरोधी, किसान विरोधी नीतियों की खिलाफत के लिए चुनाव मैदान में है। भाजपा का सूपड़ा साफ होते ही नया प्रधानमंत्री के साथ नये भारत के निर्माण का रास्ता प्रशस्त हो जायेगा।

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