ब्यूरो वाराणसी कैलाश सिंह विकास
लोकसभा सीट पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के नाते देश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट मानी जा रही है। इस सीट की महत्ता 2014 में बढ़ गई थी जब पीएम मोदी ने ऐलान किया कि वह लोकसभा चुनाव वाराणसी से लड़ेंगे। पांच वर्षों बाद पीएम मोदी एक बार फिर इसी सीट से लोकतंत्र के महापर्व में चुनावी मैदान में हैं। कहा जाता है कि बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों से भी प्राचीन है। यहाँ शास्त्रीय संगीत का घराना के साथ ही कई महान दार्शनिक, कवि, लेखक, संगीतज्ञों का गहरा नाता रहा है। जिनमें कबीरदास, वल्लभाचार्य, संत रविदास, स्वामी रामानंद, तैलंग स्वामी, शिवानन्द गोस्वामी, मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, पंडित रवि शंकर, गिरिजा देवी, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया उस्ताद बिस्मिल्लाह खां और छन्नू लाल मिश्रा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो नरेंद्र मोदी से पूर्व 2009 में बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी यहां से विजयी रहे। 1952 से ही वाराणसी का संसदीय इतिहास शुरू हो गया था। 1952 में वाराणसी (सेंट्रल) से कांग्रेस के रघुनाथ सिंह को जीत मिली थी और वह 1962 तक यहां से लगातार 3 बार विजयी रहे थे। इस सीट पर 1967 के चुनाव में सत्यनारायण सिंह ने कम्युनिस्ट पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ा और विजयी हुए। 1990 के दशक देश में मंदिर की राजनीति शुरू होने के बाद बीजेपी एक नई ताकत के रूप में उभरी और 1991 से 1999 तक लगातार जीत हासिल हुई। हालांकि 2004 के चुनाव में कांग्रेस ने लंबे समय बाद वापसी की और उसके उम्मीदवार डॉ.राजेश मिश्रा ने यहां से 3 बार के सांसद शंकर प्रसाद जायसवाल को हरा दिया। लोकसभा चुनाव 2019 एक सप्ताह पूर्व तक अत्यंत ही नीरस दिखाई दे रहा था।
परन्तु छः चरणों के मतदान के साथ ही वाराणसी लोकसभा का चुनाव अत्यन्त ही रोमांचक स्थिति में आ गया है। कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के समर्थन में पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव व स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी के रोड-शो के दौरान उमड़ी भीड़ ने सभी दलों के माथे पर बल डाल दिये। वहीं दूसरी ओर महागठबंधन की रैली में उमड़ी भीड़ को देखकर यह नहीं कहा जा सकता है कि कौन जीत रहा है। इसलिए इस बार पीएम मोदी के लिए वाराणसी की सीट बहुत आसान न होगी। एक ओर जहां कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी अजय राय अपनी जीत का दावा पेश करते हुए कह रहे हैं कि काशी की जनता पीएम मोदी के झूठे वादों से ऊब गई है और उन्हें सबक सिखाएगी। वहीं दूसरी ओर महागठबंधन की प्रत्याशी शालिनी यादव भी अपनी जीत का दावा करते हुए कहती हैं कि कांग्रेस व भाजपा की नीतियां एक हैं दोनों ही जनता से किये वादों को पूर्ण नहीं करती। भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के प्रचार की बागडोर जहां स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह संभाले हुए हैं वहीं उनके स्टार प्रचारकों की एक लंबी फेहरिस्त है और वे लगातार कांग्रेस के साथ ही महागठबंधन पर आक्रामक रूप अख्तियार किये हुए हैं। जबकि इस चुनाव में सबसे अहम मुस्लिम मतदाता शांत बैठे हुए हैं जो चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करेंगे। जो अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं कि वे किसकी तरफ हैं। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय, महागठबंधन प्रत्याशी शालिनी यादव जहां अपने-अपने जीत का दावा कर रहे हैं वहीं भाजपा समर्थकों का मानना है कि पीएम मोदी रिकार्ड मतों से जीत हासिल करेंगे।
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