जिला सवांदाता अरविन्द शर्मा
जिस जंगल जलेबी के पीछे मेरा बचपन भरी दोपहरी में दौड़ पड़ा था ।चंद पैसो में एक महिला मेरे बचपन की खुशियां लिए फुटपाथ किनारे बैठी थी। यह
सपुष्पी पादप है। यह मटर के प्रजाति का है। इसका फल सफ़ेद और पूर्णतः पक
जाने पर लाल हो जाता है खाने में मीठा होता है। यह फल मूलतः एशिया में
बहुतायत से पाया जाता हैl और बस्ती से लखनऊ जाते वक़्त सड़को के किनारे इसे
देखा जा सकता है इस फल में प्रोटीन, वसा, कार्बोहैड्रेट, केल्शियम,
फास्फोरस, लौह, थायामिन, रिबोफ्लेविन आदि तत्व भरपूर मात्र में पाए जाते
हैं. इसके पेड की छाल के काढे से पेचिश का इलाज किया जाता है. त्वचा रोगों,
मधुमेह और आँख के जलन में भी इसका इस्तेमाल होता है. पत्तियों का रस दर्द
निवारक का काम भी करती है और यौन संचारित रोगों में भी कारगर है . इसके पेड
की लकड़ी का उपयोग इमारती लकड़ी की तरह ही किया जा सकता है.पेड़ की लम्बाई
मध्यम होती है. पर इसपे चढ़ना बहुत ही कठिन होता है.इसकी टहनियां काफी घनी
होती है इसलिए जब भी आपको इसे खाने का इक्षा करे तो लग्गी लेकर जाना न
भुलें क्योंकि यह अत्यंत कटिली होती है।

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